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पहले दिन लोगों ने बैंकों में जमा करवाया 100 करोड़ रुपया, 15 करोड़ के नोट बदलवाए

Fri, 11 Nov 2016 12:13 AM IST
ब्यूरो कैथल
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दिन भर उमड़ी रही लोगों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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500 और 1000 रुपये के नोट के प्रतिबंध के बाद वीरवार को खुले बैंकों को जिले के लोगों ने निहाल कर दिया। जिले भर में करीब 100 करोड़ रुपये की राशि बैंकों में जमा करवा दी। वहीं डाकखाने में करीब एक करोड़ 66 लाख रुपये जमा हुए। सुबह से बैंकों में पहुंचे लोगों ने अपने घरों में या पास में रखे 500 व 1000 के नोट खातों में जमा करवाए। वहीं करीब 15 करोड़ रुपये की राशि के नोट लोगों ने बदलवाकर छोटे नोट लिए। पुलिस द्वारा जिले भर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
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सामान्य दिनों में होती थी 10 से 15 करोड़ की राशि जमा
एक ही दिन में इतनी बड़ी राशि जमा होने से बैंक अधिकारी गदगद हैं। उन्हें बैंकों की स्थिति मजबूत होती दिख रही है। जिला अग्रणी बैंक कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार सामान्य दिनों में 10 से 15 करोड़ रुपये की राशि जमा होती थी। लेकिन 500 व 1000 रुपये के नोट पर प्रतिबंध के चलते लोगों के घरों में जमा पूंजी बैंकों में पहुंच गई है।

टोकन देकर जमा करवाई गई राशि
नोट बंद होने के बाद सुबह ही भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। भीड़ के चलते बैंक प्रबंधन द्वारा टोकन व नोट जमा करवाने व बदलवाने का फार्म दिया गया। राशि जमा करवाने के लिए बैंकों में टोकन देकर व्यवस्था बनाई गई। एक बार में निश्वित संख्या में ही लोगों को बैंकों के अंदर ले जाया गया।
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लीड बैंक मैनेजर टीके राणा ने बताया कि वीरवार को जिले के सभी बैंकों में करीब 100 करोड़ से अधिक की राशि जमा हुई है। वहीं करीब 15 करोड़ रुपये की राशि के नोट बदले गए हैं। अभी नए नोट नहीं आए हैं। लेकिन बैंकों में उपलब्ध 100, 50 व 20 के नोटों से बदलने का काम चलाया गया। उम्मीद है कि शुक्रवार को बैंकों में नोट मिल जाएंगे।

पोस्टमास्टर विजय सिंगला ने बताया कि डाकखाने में पहले दिन 1 करोड़ 66 लाख रुपये की राशि जमा हुई है। दिन भर में करीब 19 लाख रुपये के नोट बदले गए। डाकखाने में नए नोट नहीं आए। जितने छोटे नोट थे, उन्हें बदल दिया गया।

बैंक के गेट बंद होने से परेशानी
नोटों को बदलवाने के लिए पहुंचे 70 वर्षीय बुर्जुग मोहन सिंह ने बताया कि वह सुबह साढ़े सात बजे आये थे। लेकिन बैंकों में काफी अधिक भीड़ है। इसलिए साढ़ेे नौ बजे तक भी उसका नंबर नहीं आया है। उन्होंने कहा कि बैंकों के गेट भी बंद किए गए हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

पोती की सगाई स्थगित की
गांव फ्रांसवाला निवासी दलीप सिंह ने बताया कि खेती में रुपयों के अधिक चलन के कारण वह अधिकतर राशि को अपने घर में ही रखता है। पोती की शादी के लिए दिवाली से पहले किसी आढ़ती से एक लाख रुपये उधार लिए थे। अब पांच सौ हजार के नोट बंद हो गए हैं। इसलिए तुरंत बैंक में खाता खुलवाया और रुपयों को जमा करवाया है। इसी हफ्ते पोती की सगाई करके तुरंत शादी करनी थी। अब पता नहीं कितने दिनों बाद रुपये निकलवा पाएंगे। इसलिए अभी सगाई नहीं कर सकते।

थमाई 10-10 के नोटों की गड्डियां
राजस्थान निवासी अमर सिंह ने बताया कि वह एक ज्वेलरी शॉप पर काम करता है। उसकी एक महीने की तनख्वाह आठ हजार है। उसे घर में वापस जाना है। बैंक में यहां खाता ना होने के कारण वह यहां नोट बदलवाने के लिए आया था। उसे बैंक वालों ने 10-10 के नोटों की एक हजार की चार गड्डियां थमा दी।

बाजार सूने, नहीं मायूसी, सरकार का फैसला राहत देने वाला
नोटों के बंद होने के एलान के दूसरे दिन भी बाजार काफी सुनसान रहे। खरीदार नहीं होने के कारण यहां दुकानदार आपस में एक दूसरे के साथ नोटों पर चर्चा करते नजर आए। सभी की जुबां पर केवल पांच सौ और एक हजार के नोटों की वजह से काम ढीला होने की चर्चा रही। दुकानदार सचिन, राहुल, हैप्पी और हरिओम ने कहा कि यह फैसला लोगों को राहत पहुंचाने वाला है। लेकिन नई करेंसी आने तक अभी काम काफी कम होगा। सेल भी ढीली रहेगी।
वहीं बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे लोगों को दुकानदारों द्वारा 500 और 1000 रुपये का नोट ना लिए जाने के कारण काफी परेशानियां हुईं। जिस ग्राहक के पास 100 या 50 रुपये के नोट थे, उसी को सामान बेचा गया। दुकानदार प्रतिबंधित राशि को जमा करने की बजाए खाली बैठना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जिस कारण लोग स्थिति के सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

किसान और व्यापारी भी सरकार के नए नियम से तंग
पाई। सरकार द्वारा व्यापारियों के खाते से मात्र सप्ताह में 20 हजार रुपये देने से किसानों, व्यापारियों व मजदूरों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मंडी के प्रधान रणधीर ने बताया कि इस समय मंडी में किसानों की धान की फसल आ रही है। जिससे आढ़तियों को फसल का भाड़ा, बिकने के बाद मजदूरों को उनकी मजदूरी, किसानों को खाद, बीज, दवाई, तेल के लिये पैसे तथा उनके अपने परिवार व कार्य करने वाले नौकरों आदि के घर खर्चे के लिये पैसे की जरूरत पड़ रही है। एक सप्ताह में जितने पैसे निकलेंगे इससे ज्यादा तो मजदूरों की मजदूरी बन जाती है। वे अब बाकी के पैसे का इंतजाम कहां से करे। यह कोई एक दो दिन की बात नहीं।

सोने की कीमत ब्लैक में 60 के आस-पास, कीमत असल 31 हजार 200
कैथल। बैंक में नोट बदलने के साथ ही बाजारों में इसका खूब असर देखने को मिला है। सोने का मूल्य जहां दो दिन से 31 हजार 200 रुपये पर अटका हुआ है। वही ब्लैक में सोना खरीदने वालों की खूब भीड़ उमड़ रही है। शहर के बाजारों में ब्लैक में सोना 58 हजार से 60 हजार रुपये में भी खरीदा जा रहा है। बाजार में कोई भी दुकानदार सोने के दाम बताने के लिए तैयार नहीं है। लोग महंगे दामों पर सोना खरीद रहे हैं। शहरवासी अशोक कुमार, राजेश, मनीष ने बताया कि वह सोना खरीदना चाहते हैं। लेकिन दुकानदार 55 से 60 हजार रुपये कीमत बता रहे हैं ।
 
पीएनबी बैंक के मैनेजर केएस अरोड़ा ने बताया कि पैसे जमा करवाने के लिए काफी भीड़ उमड़ रही है। पुलिस सुरक्षा में लेकर अंदर लोगों को भेजा जा रहा है। उन्होंने सुबह से लेकर 2 बजे तक केवल कैश जमा किया है। इसके बाद उन्होंने सरकार के आदेशों पर 100, 20 और 10 के नोटों को एक्सचेंज करना शुरू कर दिया था।

मोदी के फैसले को लोगों ने सराहा
ढांड। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा लिए गए फैसले का असर गांव कौल में स्थित बैंकों में देखने को मिला। कौल व आस-पास के गांव के लोगों द्वारा 500 और 1000 रुपए के नोटों को जमा करवाने का सिलसिला सुबह से देर शाम तक जारी रहा।
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