कैथल। सिंचाई विभाग की योजना फलीभूत हुई तो बारिश के दिनों में जिले के लगभग 65 गांवों में जल भराव से लोगों बड़ी राहत मिलेगी। योजना के तहत सर्कल कैथल के अधीन आने वाले पूरे कैथल व जींद के क्षेत्र में 20 हजार किलोमीटर लंबाई की पाइपलाइन डालने की तैयारी की जा रही है। इसमें से लगभग 15 हजार किलोमीटर का क्षेत्र कैथल जिले का है। सब कुछ योजना मुताबिक बेहतर रहा तो करीब 65 गांवों की लगभग 40 हजार हेक्टेयर से अधिक के रकबे की फसल को जलभराव की स्थिति आने पर बचाया जा सकेगा।
गौरतलब है कि पिछले साल जिले के चारों हलकों में बारिश के पानी के चलते जलभराव की समस्या सामने आई थी। कई माह तक खेतों में पानी जमा रहा। इस कारण तमाम किसानों की फसल डूब गई थी। इस दौरान कई गांव तो पानी की निकासी के कारण आमने-सामने भी आ गए थे। कलायत के मटौर, खेड़ी लांबा, बड़सीकरी सहित पूंडरी के गांव डीग जैसे क्षेत्र में यह समस्या ज्यादा रही थी। इसके बाद प्रभावित किसानों ने सरकार से मांग की थी कि पानी की निकासी की व्यवस्था की जाए। सिंचाई विभाग ने इस समस्या को देखते हुए यह योजना तैयार की है। इसके तहत 65 गांवों की लगभग 40 हजार हेक्टेयर से अधिक के रकबे में जलभराव की स्थिति में फसल को बचाया जा सकेगा। इसमें कलायत क्षेत्र के गांव मटौर, बड़सीकरी, खेड़ी लांबा, कुराड़, पेगा, किठाना, राजौंद, कैथल क्षेत्र के गांव जगदीशपुरा, क्योड़क, धौंस, फर्शमाजरा, पूंडरी में डीग, सौंगल, पाई, गुहला के क्षेत्र भागल सहित कई गांवों में यह पाइपलाइन डाली जाएंगी।
राज्यमंत्री सहित विधायकों ने भी उठाई थी समस्या
पिछले साल जब किसानों का जलभराव से भारी नुकसान हुआ तो राज्यमंत्री कमलेश ढांडा, विधायक लीला राम व विधायक रणधीर गोलन ने भी यह समस्या उठाई थी। इसके बाद सिंचाई विभाग ने इस योजना को मंजूरी दी। सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता मंगत राम गोयत ने बताया कि विभाग ने कैथल जिले में लगभग 15 हजार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन डालने की योजना तैयार की है। सरकार ने इसके लिए लगभग 35 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस राशि में 30 करोड़ रुपये पाइपलाइन के लिए और पांच करोड़ रुपये की राशि पंप व उपकरणों पर खर्च होगी। जहां जरूरत होगी, वहां पानी को पंप से लिफ्ट करके ड्रेनों व माइनरों में डाला जाएगा।विधायक लीला राम ने बताया कि क्षेत्र के कई गांवों में हर साल यह समस्या आ जाती है। इसीलिए सरकार ने यह योजना बनाई है। योजना के तहत पाइपलाइन के माध्यम से उस क्षेत्र से पानी को निकाला जाएगा, जहां बारिश का पानी जमा होगा। इससे किसानों की फसल को बचाया जा सकेगा। साथ ही ड्रेनों के माध्यम से उस पानी का सदुपयोग भी हो सकेगा।