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बीमा कराया, प्रीमियम भरा, फसल जली तो किसानों को नहीं मिला मुआवजा

Sun, 16 Apr 2017 11:46 PM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
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रणदीप सुरजेवाला को पीड़ित किसानों ने सुनाया दर्द - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आसमानी बिजली को छोड़कर किसी भी कारण से लगी आग के कारण जली हुई फसल के लिए मुआवजा नहीं दिया जाएगा। केवल आसमानी बिजली गिरने से फसल जलने पर ही मुआवजा दिए जाने का प्रावधान है। यह जानकारी जिले में आगजनी के चलते अपनी छह माह की कमाई गंवा चुके उन किसानों ने दी, जिनकी फसल किसी भी कारण से लगी आग के कारण नष्ट हो गई और बीमा कंपनी एवं बैंक ने उन्हें यह कहकर ठेंगा दिखा दिया कि केवल आसमानी बिजली गिरने से लगने वाली आग पर ही मुआवजा दिया जाएगा। जबकि इन किसानों ने फसल बीमा करवाया हुआ था।
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ये तो चंद किसान हैं, लेकिन ऐसे न जाने कितने किसान होंगे, जो बीमा करवाए जाने के बावजूद फसल जलने पर खाली हाथ हैं। रविवार को अखिल भारतीय कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला के आवास पर किसानों ने उनसे मुलाकात की और उनके हक में आवाज उठाने की बात कही। इन किसानों में धनौरी के राजकुमार की 8 एकड़, मुख्त्यार सिंह की 2 एकड़ व राजेश कुमार की गांव हरिपुरा में 9 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। वहीं अनुराग सिक्का की 12 एकड़ एवं मनीष सिक्का की 8 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। इनमें राजकुमार ने तो 48 हजार रुपये ठेके पर जमीन ली हुई थी। इन सभी का बैंकों ने खातों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रीमियम काट लिया था। लेकिन अब उन्हें बीमा योजना का लाभ देने से साफ इंकार कर दिया गया है।

सरकार मुआवजे के नाम पर दिखा रही ठेंगा
सुरजेवाला ने कहा कि कटाई के समय अकेले हरियाणा में तीन सालों में 15 हजार एकड़ में लगभग 70 हजार क्विंटल गेहूं फसल जलकर राख हुई है। लेकिन केंद्र व प्रदेश भाजपा सरकार किसानों के घावों पर नमक छिड़कते हुए मुआवजे के नाम पर ठेंगा दिखा रही है। प्रधानमंत्री बीमा योजना के नाम पर 9 हजार करोड़ रुपये की राशि सरकार ने जबरन किसानों के खातों से काटकर निजी कंपनियों के खाते में डाल दी। अकेले हरियाणा में करीब 500 करोड़ रुपये प्रीमियम राशि काटी गई। अब मुआवजे के लिए किसान दर-दर भटक रहे हैं। गेहूं मेें जलने से हुए नुकसान पर बहाना यह बनाया जा रहा है कि वे केवल आसमानी बिजली से गेहूं जलने पर ही मुआवजा देंगे। तो सरकार यह जानकारी दे कि शॉर्ट सर्किट, अधिक गर्मी या किसी चिंगारी से जली फसल का मुआवजा कौन देगा? ऊपर से किसानों पर दोहरी मार ये कि आपदा प्रबंधन के तहत पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा 26 से 50 प्रतिशत तक 5 हजार, 51 से 75 प्रतिशत तक 7500 और 75 से 100 प्रतिशत नुकसान पर 12 हजार की मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया था। सरकार ने इसे भी बंद कर दिया है।
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सरकार टैक्स वसूल रही तो मुआवजे में आनाकानी क्यों?
सुरजेवाला ने कहा कि डीजल व पेट्रोल के नाम पर सरकार 2 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की राशि टैक्स के तौर पर वसूलती है। पूरे देश में पेट्रोल की ट्रांसपोर्टेशन फीस लगाकर 26.86 रुपये प्रति लीटर कीमत बनती है। सरकार का टैक्स है 41.33 रुपये। डीजल की कीमत 26.75 रुपये बनती है। सरकार का टैक्स 29.76 रुपये। हरियाणा में कांग्रेस के कार्यकाल में डीजल पर वेट टैक्स 9.24 प्रतिशत था। जो भाजपा ने बढ़ाकर 17.22 प्रतिशत कर दिया है। सरकार जब इस तरह से वसूली कर रही है तो फिर किसानों को मुआवजा राशि देने में आना-कानी क्यों? मोदी सरकार का असली चेहरा यही है, किसान विरोधी है। देश की जनता इस पर जवाब मांग रही है। कांग्रेस पूरे देश में अभियान चलाएगी। जिले में करीब 300 से 400 एकड़ फसल जलकर राख हो गई। जिसमें किसानों का भारी नुकसान हुआ है। इस अवसर पर सुदीप सुरजेवाला, राजेश जागलान, दीक्षित गर्ग, रणवीर सरपंच, मोहन शर्मा, एडवोकेट प्रदीप हरित, मीडिया प्रभारी राजेंद्र शर्मा बलवंती मौजूद रहे।

योजना की गाइड लाइन पढ़ लीजिए : बलविंद्र
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कंपनी के अधिकारी बलविंद्र सिंह से जब इस बारे में जानकारी चाही तो उनका टका सा जवाब था कि आप योजना की गाइड लाइन पढ़ लीजिए। योजना में स्पष्ट लिखा है कि केवल प्राकृतिक कारणों से लगी आग ही इसमें कवर है और प्राकृतिक आग केवल आसमानी बिजली से लग सकती है। वहीं बीमा कंपनी के अधिकारी नरेंद्र कुमार ने बताया कि फसल बीमा योजना में प्राकृतिक कारणों से जो आग लगे वही इसमें कवर है। इसमें आसमानी बिजली से लगने वाली आग ही योजना में कवर है। तारों या अन्य कारणों से लगी आग से होने वाला नुकसान कवर नहीं है। यह कंपनी की नीति है।
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