संवाद न्यूज एजेंसी
कलायत। वर्षा व ओलावृष्टि से कृषि क्षेत्र में हुई भारी क्षति से किसानों में कोहराम है। सरकारी स्तर पर नुकसान भरपाई के लिए सोमवार को बढ़सीकरी खुर्द में किसानों ने पंचायत की। इसमें बड़सीकरी कलां और कमालपुर गांव के किसान शामिल हुए। उन्होंने गिरदावरी कर भरपाई के लिए फसल का मुआवजा मांगा है।
बैठक के दौरान किसानों ने गेहूं सहित अन्य फसलों के नुकसान पर विमर्श किया। शासन-प्रशासन को नष्ट हुई फसलों के बड़े रकबे की ग्राउंड रिपोर्ट से रूबरू करवाने के लिए प्रभावित क्षेत्र की फोटो एवं वीडियोग्राफी करवाई गई। सर्व सम्मति से इस प्राकृतिक आपदा के कारण हुए भारी नुकसान की गिरदावरी करवाते हुए मुआवजा देने की मांग के लिए डीसी जिला उपायुक्त के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजने का फैसला लिया।
मांगों के समर्थन में ट्रैक्टर और ट्रालियों में सवार होकर ज्ञापन देने के लिए जिला मुख्यालय की तरफ कूच किया। किसानों ने बताया कि तीनों गांवों में लगभग आठ हजार एकड़ फसल प्राकृतिक आपदा के कारण नष्ट हुई है। हालात इस कदर खराब है कि आज भी खेत खलिहानों में तालाब की तरह पानी जमा है। सत्यवान, कृष्ण नंबरदार, सुखबीर, धर्मा, राजबीर ढुल, दिनेश, विक्रम, सत्यवान, महेंद्र, बलबीर, शमशेर , रमेश, रामधारी, तरसेम, भेदू, पवन, मनफूल, कृष्ण, जगमेहर और रामदिया ने कहा कि फसल कटाई के एन वक्त पर प्राकृति की मार पड़ी हैं। इसलिए सरकार गिरदावरी करवाकर किसानों के नुकसान की भरपाई करें।
किसान किताब ढुल ने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे किसान हैं जो जमीन ठेके पर लेकर कृषि कर रहे हैं। 65 से 70 हजार रुपए प्रति एकड़ जमीन ठेके पर लेकर मुनाफे की उम्मीद से कृषि की थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा ने न केवल परिवार के मुंह से अन्न का निवाला छीन लिया है बल्कि पशुधन के सामने चारे की समस्या भी हो गई है।
बताया गया कि प्रभावित किसानों की सूची में सत्यवान की 15, बीरा की छह, विक्रम की 25, बलवान की तीन और इसी तरह अन्य किसानों की गेहूं की फसल जलमग्न हो गई है। किसानों का कहना है कि जिस प्रकार खेतों में फसलें तहस-नहस हुई उसकी कटाई भी संभव नहीं है।