संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। किसान नेता राकेश टिकैत सोमवार को कुलतारण गांव में पहुंचे। यहां पर वे एक किसान की मौत पर शोक प्रकट करने पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने किसानों के साथ भी बैठक की। इस दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर कड़ा हमला बोला। टिकैत ने आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि पहले हरियाणा में बाहर की फसल भी बिकती थी, लेकिन स्थिति यह है कि यहां के किसानों की फसल मंडियों में आती तो है, लेकिन बिकती नहीं है।
उन्होंने कहा कि 14 फरवरी को सरकार के साथ होने वाली बैठक में किसानों की मांगों पर चर्चा होगी। उन्होंने जगजीत डल्लेवाल के नेतृत्व में चल रहे किसान आंदोलन को पूरा समर्थन देने की बात कही।
किसान नेता राकेश टिकैत ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमएसपी सिर्फ हरियाणा का नहीं, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है। किसान नेता ने सरकार की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बड़े व्यापारियों का कर्ज माफ कर रही है, जबकि छोटे दुकानदार और किसान-मजदूरों की अनदेखी कर रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति रही तो जल्द ही 70 प्रतिशत जमीन उद्योगपतियों के हाथों में चली जाएगी। साप्ताहिक बाजारों को खत्म करने की साजिश की भी बात कही।
टिकैत ने किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय ही स्पष्ट हो गया था कि सरकार किसानों के हित में नहीं सोच रही। उन्होंने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की और कहा कि किसान अपने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
खनौरी और शंभू बार्डर पर चल रहे धरने को एक कमेटी का आंदोलन बताया
गुहला-चीका। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार पूरे देश में एमएसपी लागू नहीं करती तब तक उनकी लड़ाई यूं ही जारी रहेगी। राकेश टिकैत सोमवार को किसान नेता हरदीप बदुसई की भतीजी के शादी समारोह में शिरकत करने चीका आए थे। इस मौके पर राकेश टिकैत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार किसान संगठनों से डरकर ओछी राजनीति पर उतर आई है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के इशारे पर अब कई तथाकथित किसान संगठन बनाने लगे हैं जो सिर्फ भाजपा की भाषा बोलते हैं। शंभू व खनौरी बॉर्डर पर किसानों के चल रहे धरने प्रदर्शन पर पूछे गए सवाल पर राकेश टिकैत ने कहा कि ये धरने संयुक्त किसान मोर्चा के न होकर एक कमेटी का आंदोलन है और इन धरनों को संयुक्त मोर्चा का समर्थन नहीं है।
उन्होंने कहा कि इन धरनों को समर्थन देने या ना देने के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। इसके फैसले के बाद ही कोई निर्णय लिया जागा, लेकिन एक किसान होने के नाते वे इन धरनों का समर्थन करते हैं। टिकैत ने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर उनका संगठन फरवरी माह में उत्तर प्रदेश में 11 महापंचायतों का आयोजन करेगा। टिकैत ने माना कि दिल्ली बार्डर पर आंदोलन करने वाले किसानों की फौज अब बिखरी हुई है और मोर्चा के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन बिखरे किसान संगठनों को एकत्रित करना है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी क्रांति वैचारिक क्रांति है और हमारा संगठन इस क्रांति की तरफ जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खनौरी बॉर्डर पर अनशन पर बैठे जगजीत सिंह डल्लेवाल अभी मेडिकल पर है और उनकी कमेटी 14 फरवरी को सरकार के साथ बात करेगी। हम उस कमेटी में शामिल नहीं हैं। कहा कि यदि अनशन पर बैठे किसानों के साथ सरकार अत्याचार करती हैं तो फिर हम किसानों का साथ देंगे। संवाद