कैथल। चौदह महीने सीरियाई जेल में एक रोटी के सहारे जीवित रहे अरुण कुमार की हालत बिगड़ गई है। उनकी आंतों ने काम करना बंद कर दिया। जिस कारण उसे निजी अस्पताल के एमरजेंसी वार्ड में रखा गया है जहां उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। परिजनों को उसकी चिंता सताने लगी है। साथ ही उस एजेंट के प्रति भी रोष बढ़ता जा रहा है, जिसकी वजह से वे जेल में 14 माह बीता कर इसी माह भारत लौटे थे।
गांव जगदीशपुरा निवासी अरुण कुमार, सर्वजीत सिंह सहित कुरुक्षेत्र जिले के दो युवक लेबनान जाते समय सीरिया में पकड़े गए थे। जहां से 14 महीने तक जेल में बंद रहे। उन्हें वहां तक पहुंचाने वाले पिहोवा के ही एजेंट ने पकड़े जाने के बाद उनकी कोई सुध नहीं ली। उनके परिजनों द्वारा कई बार गुहार लगाने के बावजूद जब कोई मदद नहीं मिली तो भारतीय दूतावास में संपर्क किया गया।
वहां के अधिकारियों ने दो माह पूर्व इन युवकों से जेल में संपर्क किया। इसके बाद आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी करते हुए भारतीय दूतावास ने चारों युवकों को वहां से रिहा करवाकर वतन वापसी करवाई।
घर लौटने पर अरुण ने बताया था कि सीरियाई जेल में उन्हें एक रोटी खाने को मिलती थी। लंबे समय तक यही भोजन खाया।
जिस कारण काफी परेशानियां हुई थीं। घर लौटने के बाद करीब दस दिनों तक वह ठीक रहा। लेकिन शनिवार को अचानक उसके पेट में दर्द हुआ। इसके बाद हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे यहां एमरजेंसी वार्ड में दाखिल करवाना पड़ा। अरुण के पिता कृष्ण कुमार ने कहा कि उसका 23 वर्षीय बेटा एजेंट की वजह से जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। उसके खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करे। ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
भूख एवं बुखार के कारण पेट की आंत ने करना बंद किया:-शाह अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सक डा. राजेश शर्मा ने कहा कि लंबे समय तक बुखार रहने एवं भूख के कारण अरुण की आंतों ने काम करना बंद कर दिया है। जिस कारण उसकी हालत गंभीर है। दो-तीन दिन में कुछ सुधार की उम्मीद है। फिल्हाल उसका इलाज चल रहा है।
एजेंट के खिलाफ दर्ज है एफआईआर:-पुलिस ने पिहोवा के एजेंट के खिलाफ खिलाफ एफआइआर भी दर्ज की है। एसएचओ सदर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पुलिस एजेंट के खिलाफ जांच कर रही है।