मौके पर मौजूद जांच अधिकारी
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प्रदर्शनकारियों को चौक पर जाने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे। एक बैरिकेड तोड़कर प्रदर्शनकारी जैसे ही आगे बढ़ने लगे तो पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने वाटर कैनन भी मौके पर तैनात कर प्रर्दशनकारियों को रोकने की चेतावनी दी। देरशाम तक तनाव की स्थिति बनी रही। रात को भी एसपी अभिषेक जोरवाल ने भी चौक पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
कानून व्यवस्था भंग नहीं होने देंगे : एसपी
एसपी अभिषेक जोरवाल ने कहा कि जिले में किसी भी प्रकार से कानून व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद है। इसके लिए दो हजार पुलिस कर्मियों की पुलिस फोर्स रिजर्व रखी गई है।
यह है विवाद
गुर्जर समाज की मांग पर सरकार ने ढांड रोड पर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा लगाई है। इस प्रतिमा पर सम्राट मिहिर भोज के आगे गुर्जर शब्द लिखा गया है। राजपूत समाज इस गुर्जर शब्द को हटा हिन्दू लिखने की मांग कर रहा है। इसको लेकर ही दो पक्षों में विवाद की स्थिति बनी है।
सम्राट मिहिर भोज को गुर्जर समाज से बताने पर हुए बवाल से पहले जिला प्रशासन राजपूत समाज को नहीं मना पाया। यदि समाज के लोगों को प्रशासनिक अधिकारी मना लेते तो यह बवाल शायद न होता। मान-मन्नौवल में प्रशासन को खूब पसीना बहाना पड़ा। असफल होने पर हंगामा हो गया। समाचार लिखे जाने तक हनुमान वाटिका में समाज के लोग डटे रहे। अपुष्ट खबरों में यह भी बताया गया है कि तनाव को देखते हुए शहर के स्कूल वीरवार को बंद किए जा सकते हैं। हालांकि इसकी देर रात तक पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस प्रकरण के तहत दिनभर बवाल हुआ और रात तक भी राजपूत समाज के लोग सड़कों पर डटे रहे। वहीं, राजपूत समाज के लोगों ने सुबह से ही उस चौक तक कूच करने की रणनीति बना ली थी, जहां सम्राट की नई प्रतिमा लगाई गई है। उनकी जिद थी कि सम्राट के नाम के आगे से गुर्जर शब्द हटाया जाए।
पहले तो राजपूत समाज के सभी लोग बुधवार सुबह के समय ही हनुमान वाटिका में एकत्रित हो गए थे। इसी समय समाज के लोगों की रणनीति चौक तक कूच करने की थी, लेकिन प्रदर्शन की रहनुमाई कर रहे समाज के लोगों ने डीसी जगदीश शर्मा से मुलाकात करने का फैसला लिया।
इस फैसले के तहत ही समाज के लोग भारी संख्या में सचिवालय परिसर में पहुंच गए थे। उनकी डीसी जगदीश शर्मा से मुलाकात तो हुई, लेकिन इस मामले में कोई बात नहीं बन पाई। डीसी ने समाज के लोगों से कहा कि वे कानून व्यवस्था किसी भी हालत में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। उनके लिए सभी वर्ग और समाज के लोग एक समान हैं। वे इस मामले में बीच का रास्ता निकालेंगे।
इस आश्वासन पर भी लोग नहीं माने। इसके बाद वे सचिवालय परिसर में ही धरने पर बैठ गए। इस दौरान समाज के लोगों के साथ वहीं कई दौर की बैठकें भी हुईं। फिर भी कोई नतीजा नहीं निकला। नतीजा न निकलने पर धरने पर बैठे लोग खफा हो गए और करनाल रोड के रास्ते कुरुक्षेत्र बाइपास की तरफ बढ़ने लगे। बस स्टैंड के बाहर पुलिस की तरफ से लगाए गए नाके को तोड़कर प्रदर्शनकारी आगे बढ़ गए।
इसी दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की बस को भी घेर लिया। इसके बाद डीसी आवास के समीप चौक पर पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी। यहां पर तीन ड्यूटी मजिस्टे्रट, एसडीएम संजय, गुहला डीएसपी सुनील, डीएसपी सज्जन, डीएसपी उम्मेद सिंह, डीएसपी ललित सहित अन्य पुलिस अधिकारी भी शामिल रहे। चौक को छावनी में तब्दील कर दिया। वहीं, गुर्जर समाज के लोगों ने इस प्रकरण पर शांति बनाए रखी और दोनों समाज के लोगों से शांति की अपील भी की।
यहां पर गुहला के डीएसपी सुनील कुमार ने अनाउसमेंट करके प्रदर्शनकारियों को वापस लौटने की चेतावनी दी, लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस को चकमा देकर वहीं मौजूद एक पार्क और इसके साथ लगते रास्ते से चौक की तरफ दौड़ पड़े। इसी दौरान पुलिस ने तुरंत व्यवस्था संभालते हुए प्रदर्शनकारियों पर पुलिस लाइन के बाहर हल्का बल प्रयोग किया और वहां से खदेड़ते हुए हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बीच स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
एक बार तो प्रशासनिक अधिकारियों की सांसें फूल गई। फिर एसडीएम संजय ने प्रदर्शनकारियों को यहां से 10 मिनट में वापस जाने का अल्टीमेटम दिया। फिर भी प्रदर्शनकारी नहीं माने और चौक की तरफ जाने के लिए प्रयास करते नजर आए। इसी बीच प्रदर्शनकारियों पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने आंसू गैस के गोले छोड़ने के आदेश दिए। पुलिस ने एक आंसू गैस का गोला छोड़ा और प्रदर्शनकारियों की भीड़ तितर-बितर हो गई। इसके बाद 90 से अधिक प्रदर्शनकारियों को सरकारी बसों में बैठा हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी वापस डीसी आवास की तरफ वापस लौट गए। कुछ देर तक तो प्रदर्शनकारी वहां बैठे, लेकिन बाद में वहां से चले गए।
मूर्ति लगानी है तो गुर्जर शब्द हटाकर लगाएं : कर्नल देवेंद्र
हरियाणा राजपूत प्रतिनिधि सभा के संरक्षक कर्नल देवेंद्र सिंह वीर चक्र ने बताया कि डीसी से बातचीत हुई है। गुर्जर शब्द लगाकर समाज के लोग अनावरण करवाना चाहते हैं। ऐतराज यह था कि मिहिर भोज राजूपत समाज से हैं। मूर्ति लगानी है तो उनके नाम के आगे से गुर्जर शब्द हटाकर प्रतिमा लगाई जाए। इतिहासकारों की दोनों पक्षों की तरफ से कमेटी बने, जो वह तय करेगी कि सम्राट मिहिर भोज कौन से समाज से हैं।
उसके साथ ही उन्हें फैसला मंजूर होगा। इस बारे में ग्वालियर हाईकोर्ट में मामला लंबित है। जब तक फैसला नहीं होता, तब तक कोई यह जातिसूचक शब्द लगा प्रतिमा का अनावरण न किया जाए। गुर्जर समाज के लोग इस फैसले को दरकिनार कर रहे हैं। उनकी मांगों को सरकार नहीं मान रही है और अपने अड़ियल रवैया अपनाए हुए है। वे शांतिपूर्वक अपनी मांग को मनवाने के लिए ही प्रदर्शन कर रहे थे। यह एक राजनीति साजिश है। उनका संघर्ष जारी है।
दोनों समाज के लोग भाईचारा बनाए रखें : शमशेर
गुर्जर भवन के जिला प्रधान शमशेर ने बताया कि अकेले कैथल में ही प्रतिमा का अनावरण नहीं हो रहा है। देश में कई स्थानों पर भी प्रतिमा अनावरण पहले हो चुका है। इसे स्वयं राजपूत समाज से संबंधित मंत्रियों व मुख्यमंत्रियों ने करवाया है। राजपूत समाज की तरफ से भाईचारा बनाने की बात नहीं की जा रही है। दोनों समाज में भाईचारा है। इसलिए गुर्जर समाज धैर्य रखेगा और प्रशासन व सरकार के साथ मिलकर चलेगा।
बयानों से माहौन न बिगाड़ें : ओमप्रकाश
कुरुक्षेत्र गुर्जर धर्मशाला के प्रधान ओमप्रकाश राठी ने कहा कि वह गुर्जर समाज के लोगों से अपील करते हैं कि वे धैर्य बनाकर शांति का परिचय दें। कोई भी ऐसा बयान न दें। जिससे माहौल बिगड़े।
स्थिति काबू में है : एसडीएम
एसडीएम संजय ने बताया कि राजपूत के समाज के युवाओं के प्रदर्शन के स्थिति काबू में कर ली गई थी। अधिक विरोध के चलते पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा था। उन्हें समझाया गया था, लेकिन वे नहीं माने। अब जिला प्रशासन ने स्थिति संभाल ली है।