बैंकों में हड़ताल से परेशान रहे लोग
कैथल। राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारियों ने बुधवार को अपनी मांगों को लेकर हड़ताल की और बैंक बंद करके करनाल रोड पर एसबीआई के सामने धरना दिया। कर्मचारियों ने कहा कि नवंबर 2017 से 10 लाख बैंक कर्मियों की वेज रिविजन पेंडिंग है, हर बार की तरह इस बार भी सरकार ने बैंककर्मियों के वेतन को लेकर लंबा मौन व्रत साध रखा है। बैंक कर्मी अपनी जायज मांगों को लेकर जब असहाय और मजबूर से हो जाते हैं तभी निर्विकल्प होकर अपने 14 लाख बैंक कर्मियों और उसके परिवार के आर्थिक सुरक्षा के लिए हड़ताल करते हैं। उसके बदले सैलरी कटवाते हैं। बैंक कर्मचारियों का काम जोखिम का होता जा रहा है। जितना जोखिम होता है, उतना ही वेतन दिया जाना चाहिए। लेकिन उनके साथ अन्याय हो रहा है। नोटबंदी में ऐसे कितने ही कैशियर ने लाखों का लोन लेकर मोदी जी की योजना को सफल बनाने के विशाल बलिदान दिया। वेतन के नाम पर कर्मचारियों को घाटा बता दिया जाता है। बड़े प्रबंधन व सरकार के साथ मिलकर उद्योगपतियों के साथ लूट का खेल खेला जाता है। बदनाम आम बैंक कर्मियीं को किया जाता है। कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगों को शीघ्र पूरा किया जाए। जिला कैथल आल इंडिया बैंक ऑफिसर कंफेडरेशन के उपसचिव अरविंद चावल व जिला सचिव कुलदीप धारीवाल ने कहा कि उनकी मांगों को पूरा किया जाए। अवसर पर क्षेत्रिय सचिव स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन कृष्ण मिगलानी ने आह्वान किया कि बैंक कर्मचारियों की हालत के बारे में आम जन को बताया जाए। ताकि सभी को पता चल सके कि वे किस स्थितियों में काम कर रहे हैं। हड़ताल के कारण बैंक उपभोक्ता परेशान रहे। एक उपभोक्ता मुसाफिर ने कहा कि वह अपनी बेटी के ईलाज के लिए 1 लाख रुपये निकलवाने के लिए आया था। लेकिन बैंक बंद होने के कारण उसे काफी परेशानी हो रही है।