सीवन गेट स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला में अध्यापिका ने एक अध्यापक की प्रताड़ना और छेड़छाड़ से तंग आकर जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। अध्यापिका की हालत गंभीर बनी हुई है।
उसे शाह अस्पताल में आईसीयू में रखा गया है। अध्यापिका के परिजनों का कहना है कि उसने एक सप्ताह पहले डीसी को शिकायत देकर आत्महत्या की अनुमति मांगी थी। जिस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे तंग आकर उसने शनिवार को ड्यूटी के दौरान ही जहर निगल लिया।
अध्यापिका के परिजनों ने पाठशाला में कार्यरत एक पुरुष अध्यापक पर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने तथा दूसरी महिला अध्यापिकाओं पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है। घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया।
अध्यापिका कंचन मित्तल के पति अजय कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी जेबीटी टीचर के तौर पर विद्यालय में कार्यरत है। वहां कार्यरत एक अध्यापक उसकी पत्नी को कई साल से प्रताड़ित कर रहा है। जिसके डर की वजह से उसकी पत्नी दो साल तक छुट्टी पर रही है।
आरोपी अध्यापक स्कूल में उससे छेड़छाड़ करता तथा अपशब्द कहता। साथी महिला अध्यापिकाएं भी चुप्पी साधे हुए उसकी पत्नी की प्रताड़ना में शामिल रही हैं। उसकी पत्नी ने इस बारे में कई बार शिकायतें कीं लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
पिछले सप्ताह भी छह पृष्ठ का पत्र लिखकर डीसी से आत्महत्या की अनुमति मांगी थी जिसे डीसी ने एसडीएम को रेफर कर दिया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। शनिवार को उसके पास 1:20 बजे फोन आया कि उसकी पत्नी ने कुछ खा लिया है। जिस पर उसने स्कूल में पहुंचकर उसे अस्पताल में भर्ती करवाया।
बेटे से बात करने के लिए किया था फोन
अध्यापिका के पति ने बताया कि उसकी पत्नी ने उसे फोन किया था कि एक बार उसके बेटे से बात करवा दो। उसने पूछा कि क्या हुआ? तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। स्कूल पहुंचकर देखा तो उसने कुछ खाया हुआ था।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही
डीसी केएम पांडुरंग की ओर से कंचन द्वारा दिए गए आत्महत्या की अनुमति के पत्र को एसडीएम को रेफर किया गया था लेकिन एक सप्ताह बीत जाने के बावजूद इस संवेदनशील मामले में कोई कदम न उठाना अपने आप में जांच का विषय है।
मामले की सूचना मिली है। अब तक महिला अध्यापिका होश में नहीं आई है। होश में आने के बाद बयान लेने के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।
वीरेंद्र सिंह खर्ब, थाना शहर प्रभारी
कुछ दिन पहले महिला अध्यापिका के परिजन मुझसे मिले थे। इस बारे में एसडीएम को जांच कर आदेश दिए थे। अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं आई है। साथ ही महिला के परिजनों को पूर्ण सुरक्षा का आश्वासन दिया गया था। शनिवार की घटना के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। मैं पता करवाऊंगा। जो भी दोषी होगा। आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
केएम पांडुरंग, डीसी, कैथल।
ये है पत्र का मजमून
मैं कंचन जेबीटी अध्यापिका राजकीय प्राथमिक पाठशाला सीवन गेट कैथल में दस साल से कार्यरत हूं। दस साल से अनेकों संघर्षों का सामना कर रही हूं। एक पुरुष अध्यापक उसने 16 अक्तूबर, को स्कूल इंचार्ज के सामने गंदा व्यवहार किया। इन बातों को मैं अपने घर भी नहीं बता सकती। इस स्कूल में कोई कार्य ठीक नहीं होता। मिड-डे मील, अध्यापक हाजिरी रजिस्टर, अन्य कार्य अब तक मैं आंखें बंद किए बैठी थी।
नर्सरी का बच्चा गुम होने पर मुझे प्रताड़ित किया गया। 14 अक्तूबर को म अध्यापक ने मेरे साथ ऐसे गंदे शब्दों के साथ व्यवहार किया कि मैं घर में भी बताने में असमर्थ थी। आज 19 अक्तूबर को एक अधिकारी के सामने मुझे ही प्रताड़ित किया गया। एक व्यक्ति अध्यापक का प्रोफेशन इसीलिए अपनाता है कि आगे चलकर बच्चों को सच्चाई व ईमानदारी के रास्ते पर ले जा सके। आज मैं टीचिंग लाइन छोड़कर मौत की ओर अग्रसर हो रही हूं।
जब एक टीचर एक फाइनेंसर की तरह मुझे धमकी दे रहा है। जब एक महिला अध्यापिका की कोई इज्जत नहीं है तो उसे जॉब छोड़कर घर बैठ जाना चाहिए। मैं गंदे शब्दों को सहन करने में असमर्थ हूं। हर दिन स्कूल में केवल खिचड़ी व चावल बनता है। इस खराब भोजन की जानकारी इंटरर्न अध्यापकों व दूसरे अध्यापकों को भी पता है लेकिन इंचार्ज एवं इस पुरुष अध्यापक के आगे कोई नहीं बोल सकता।
अपनी बात दबाने के लिए पुरुष अध्यापक पहले ही यूनियन ग्रुप में बात कर चुका है। मैं अपनी बात किसी को बताने में समर्थन नहीं हूं। किसी अधिकारी एवं मीडिया के आने पर मुझे ही दोषी ठहराया जाता है। मुझे औरत होने पर शर्म महसूस होती है। आज भी मेरे पास आंसू बहाने के अलावा कोई समाधान नहीं है। पुरुष प्रधान समाज में एक औरत का वजूद मुझे समझ में आ रहा है।
वह अध्यापक सबको अपने पक्ष में कर चुका है। मेरे साथ नहीं बल्कि यहां पूर्व में रही अन्य बहुत सी महिला अध्यापिकाओं के साथ यह समस्या है। आज मैं अपनी समस्या का समाधान खुद ही कर रही हूं। क्योंकि इस अध्यापक जैसे भेड़िए हर जगह मौजूद हैं। मैं अपने सम्मान को कब तक बचाऊं। हर वक्त राजनीतिक की दस्तक स्कूल में सुनाई देती है।
स्कूल शिक्षा का मंदिर है या राजनीति का अखाड़ा। कहां जाऊं संसार मेरे लिए खत्म हुआ दिखता है। इतने शब्द लिखे पर भी शांत नहीं हो पा रही हूं। आंसू भी आंखों में से खत्म नहीं हो रहे। इतनी बातें लिखने की हिम्मत मुझे मेरी छठी कक्षा में पढ़ रही छात्रा द्वारा अध्यापक दिवस पर दिए गए पैन से आई है।
मैं न तो ये बातें मीडिया को दिखाने या उनकी हमदर्दी हासिल करने के लिए कर रही न ही अन्य महिला अध्यापकों को भड़काने के लिए। मुझे जितनी जानकारी है, उस हिसाब से राष्ट्रपति को आत्महत्या के बारे में लिखा जाता है। पर मेरी बात उन तक पहुंचने पर पता नहीं कितना वक्त लग जाएगा। इसीलिए मेरे पास समय की कमी होने के कारण मैं आपसे आत्महत्या की परमिशन मांगती हूं। आज के दिन के बाद मैं दूसरा दिन इस धरती पर देखने में समर्थन नहीं हूं। सहनशक्ति जवाब दे चुकी है।