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छह साल बाद एसडीओ के खिलाफ मामला दर्ज

Thu, 04 Feb 2016 11:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कैथ्ाल
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छह साल बाद गुहला उपमंडल में तैनात बिजली निगम के एसडीओ तरसेम सिंह के खिलाफ चीका पुलिस ने भ्रष्टाचार उन्मूलन की धारा 7 व 13 के तहत केस दर्ज किया है। एसडीओ पर रिश्वत लेने के आरोप हैं। इसे शिकायतकर्ता छह साल तक चले लंबे संघर्ष का नतीजा बता रहे हैं।
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यह मामला खुद बिजली निगम के एमडी की शिकायत पर दर्ज हुआ है। बिजली महकमे को चार मार्च तक उक्त अधिकारी के खिलाफ अपनी ओर से की गई कार्रवाई के बारे में हाईकोर्ट को जवाब देना है। शिकायतकर्ता पक्ष ने पत्रकार वार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी।

बिजली निगम के गुहला उपमंडल में तैनात एसडीओ तरसेम सिंह पर आरोप है कि वर्ष, 2010 में जब वे चीका उपमंडल में एसडीओ थे, तो उन्होंने एक बिजली कनेक्शन लगाने के एवज में चीका निवासी एक महिला के परिजनों से 71,000 रुपये की रिश्वत ली थी। आरोप यह भी है कि इस अधिकारी ने आवेदकों से पैसे तो ले लिए लेकिन बाद में कनेक्शन लगाने के नाम पर आनाकानी करने लगा।
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शिकायतकर्ता पक्ष से जुड़े चीका निवासी गुलशन कुमार पुत्र बृज लाल ने दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि वर्ष, 2010 में उन्होंने अपने कैथल रोड स्थित एक परिसर के लिए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था। एक महीने के भीतर कनेक्शन लेने के लिए उन्होंने 30 हजार रुपये की रिश्वत दी।

मार्च, 2010 में सिक्योरिटी जमा करवाने के बावजूद जब दो महीने तक कनेक्शन नहीं लगा तो उन्होंने एसडीओ तरसेम सिंह से फिर बात की। तरसेम ने एक सरकारी स्कीम का हवाला देकर सरकारी फीस व अन्य खर्चों के नाम पर उनसे 1 लाख 55 हजार रुपये और ले लिए तथा तमाम खर्चों का 1 लाख 47 हजार 758 रुपये का एस्टिमेट बनाकर दे दिया।

नहीं दी रसीद
गुलशन कुमार ने बताया कि एसडीओ तरसेम सिंह ने वर्ष, 2010 के सातवें महीने में कनेक्शन तो लगा दिया लेकिन दिए गए एक लाख पचपन हजार रुपये की कोई रसीद नहीं दी। जब रसीद के लिए पूछा तो अधिकारी ने एक महीने बाद मात्र 1 लाख 14 हजार रुपये की सरकारी रसीद बनाकर उन्हें थमा दी। जब उन्होंने बाकी पैसों के बारे में पूछा तो धमकाना शुरू कर दिया।

विजिलेंस ने ठहराया था दोषी
गुलशन कुमार ने बताया कि उन्होंने एसडीओ तरसेम सिंह की शिकायत बिजली निगम में कर दी तो निगम ने अपने विजिलेंस विभाग से इस मामले की जांच करवाई। जांच के दौरान तरसेम सिंह को रिश्वत लेने का दोषी पाया गया। जिसके आधार पर बिजली निगम ने 7 अक्तूबर, 2011 को एसडीओ तरसेम सिंह को चार्जशीट करके रेगुलर जांच की सिफारिश कर दी।

कार्रवाई नहीं हुई तो गए हाईकोर्ट
गुलशन कुमार ने बताया कि जब बिजली निगम की अपनी जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद एसडीओ तरसेम सिंह के खिलाफ विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने अब बिजली निगम के एमडी को एसडीओ तरसेम सिंह के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में जवाब तलब करते हुए 4 मार्च, 2016 की तारीख तय की है।

हर जांच के लिए तैयार : एसडीओ
अपना पक्ष रखे हुए एसडीओ तरसेम सिंह ने कहा कि वे निर्दोष हैं तथा साजिश के तहत झूठे तथ्य पेश करके उन्हें फंसाया जा रहा है। वे हर तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं।
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