फसल बीमा योजना का विरोध करते हुए इनेलो ने मंगलवार को शहर में प्रदर्शन कर प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन भेजा। पूर्व मुख्य संसदीय सचिव और इनेलो नेता रामपाल माजरा के नेतृत्व में इनेलो कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
माजरा ने कहा कि ऐसा कभी नहीं हुआ है कि किसी भी सरकार द्वारा किसानों के हित में लिए जाने वाले किसी भी निर्णय से पहले किसानों से बातचीत न की गई हो। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना के तहत पूरे गांव को एक इकाई माना गया है। उन्होंने मांग की कि गांव को पूरी इकाई न मानकर किसान की जोत को इकाई माना जाए। बिना किसान की सहमति के उनके खातों से फसल बीमा योजना का प्रीमियम काटने का यह फरमान वापस लेते हुए सरकार स्वयं इस योजना का प्रीमियम वहन करें।
उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा ने किसानों को स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार फसलों के लाभकारी मूल्य देने का वादा किया था और अब किसानों को यह कहकर लुभाने का प्रयास किया जा रहा है कि 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने की योजना लागू की जा रही है। 2015 में फसल बीमा योजना के तहत निजी कंपनियों ने किसानों से प्रीमियम के तौर पर 1500 करोड़ रुपये कमाए। अब इस फसल बीमा योजना में दाल, सब्जियों व अन्य कई फसलों को शामिल नहीं किया गया है जो किसान की मुख्य फसलें हैं।
इससे पूर्व जवाहर पार्क में इनेलो कार्यकर्ता एकत्रित हुए। वहां भी सरकार के खिलाफ जमकर रोष प्रकट किया। इस अवसर जिलाध्यक्ष पंडित कंवरपाल करोड़ा ने कहा कि इनेलो सदैव जनता के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती रही है। इस अवसर पर पूर्व मंत्री सुरेंद्र मदान, जाट शिक्षा समिति के प्रधान रणबीर ढुल फौजी, पूर्व विधायक बूटा सिंह, मक्खन सिंह, व्यापार सैल के जिला प्रधान जिप्पी शोरेवाला, कंवरजीत वालिया, हरदीप पाडला, दिनेश बालू, ओमप्रकाश ढांडा, अनिल तंवर, शमशेर और सूबे सिंह कुराड़, राजेश शर्मा आदि इनेलो पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।