संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। सहकारी समितियों में हुए घोटाले पर चीका को-ऑपरेटिव सोसाइटी के सदस्य भी मुखर हैं। उनका कहना है कि यदि चीका को-ऑपरेटिव सोसाइटी के वेतन रजिस्टर की जांच करवाई जाए तो घोटाले का पूरा सच सामने आ जाएगा।
उन्होंने वर्ष 1992 से लेकर आज तक बनी सभी सहकारी समितियों की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो से करवाने को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के एलान का स्वागत भी किया है।
सदस्य रणधीर सिंह, प्रदीप कुमार, सरदारा राम, मेहर सिंह, रामपाल ने कहा कि सरकार ने सहकारी समितियों का गठन गरीब व जरूरतमंद किसानों की मदद के लिए किया था। ऐसी व्यवस्था की गई थी कि किसानों की ओर से चुने निदेशक व अधिकारी आपसी तालमेल से काम कर किसान को लाभ पहुंचाएंगे लेकिन दुख कि बात है कि जिन लोगों को यह जिम्मेदारी सौंपी थी। वही लोग समितियों को घुन की तरह खाने लगे और मुख्यमंत्री को विधानसभा में खुद कहना पड़ा है कि समितियों में बड़े स्तर पर घोटाला हुआ है।
चीका सोसाइटी के सदस्यों के अनुसार सोसाइटी में फर्जी तरीके से भर्ती किए गए कर्मचारियों का प्रस्ताव डीआर कुरुक्षेत्र के पास विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव को रद्द करने के लिए सदस्यों की तरफ से डीआर को पत्र लिखा है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि चीका सोसाइटी में इन फर्जी कर्मचारियों के अलावा भी बिना मंजूरी के एक दर्जन से अधिक लोगों को सोसाइटी का कर्मचारी दिखा लाखों रुपये वेतन के रूप में निकाले गए हैं जबकि ये फर्जी कर्मचारी कभी भी कार्यालय में नहीं देखे गए।
सदस्यों ने कहा कि यदि सोसाइटी के वेतन रजिस्टर की जांच करवाई जाए तो घोटाले का पूरा सच सामने आ जाएगा। उनके अनुसार सोसाइटी से रिटायर हुए आधा दर्जन कर्मचारियों को सालों बाद भी पांचवें वेतन आयोग का लाभ एसीपी नहीं दिया जा रहा। रिटायर हुए कई कर्मचारी दिवंगत हो चुके हैं। उनके परिजन सोसाइटी के अधिकारियों के पास चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अधिकारी उनके एरियर की राशि जारी नहीं कर रहे।
रिटायर कर्मचारियों के परिजन नायबो देवी, करनैलो देवी, छन्नो देवी व पूर्व प्रबंधक गुरमेल सिंह ने बताया कि सोसाइटी के अधिकारी उनके बकाया का लाखों रुपये दबाए बैठे हैं लेकिन जब अपनी मर्जी से रखे कर्मचारियों को वेतन देने की बात आती है तो तुरंत जारी कर दिया जाता है।
जो भी कर्मचारी रखे गए थे वे सभी मेरे से पूर्व के प्रबंधक द्वारा रखे गए थे। सोसाइटी में वर्तमान में कार्यरत कर्मचारी नियमों के अनुसार लगे हैं। अभी समिति का बोर्ड नहीं है। जैसे ही बोर्ड बनेगा सभी कर्मचारियों का बकाया जारी कर दिया जाएगा। चीका सोसाइटी में कोई घोटाला नहीं है, सरकार जब मर्जी जांच करवा लें। - राजेंद्र कुमार, प्रबंधक, को-ऑपरेटिव सोसाइटी, चीका।