जिले के स्कूलों में पिछले आठ माह से कार्यरत 160 कंप्यूटर अध्यापकों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। आठ माह तक काम करने के बाद दो माह का वेतन ही रिलीज किया गया है।
सिर्फ कैथल जिले में कंप्यूटर अध्यापकों का कंपनियों की ओर लगभग एक करोड़ 15 लाख से ज्यादा की राशि बकाया है। कंप्यूटर अध्यापक कई विधायकों को ज्ञापन भी दे रहे हैं।
लेकिन कंप्यूटर अध्यापकों को वेतन मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। कंपनी के अधिकारी वेतन संबंधी विषय पर बात करने तक को तैयार नहीं है।
कंप्यूटर अध्यापक नेता शिवदत्त शर्मा, राकेश कुमार, प्रदीप कुमार, मनदीप सिंह, दरावेश कुमार, अनूप सिंह, अनिल, पंकज, सुरेंद्र मान, मनोज, डिंपल, सुरेश, रमेश, सोनिया, राजीव, हरदयाल, केशव, सतनाम, विनोद ने बताया कि गत सितंबर माह से स्कूलों में उनकी नियुक्ति की गई थी।
प्रदेश में लगभग 3000 और कैथल में 160 के लगभग कंप्यूटर अध्यापक नियुक्त किए गए थे। उन्हें कंपनियों के माध्यम से 12000 रुपये प्रति माह के हिसाब से वेतन दिया जाना था।
पिछले आठ महीने में उन्हें केवल दो माह के वेतन की राशि दी गई है। उन्हें बताया गया है कि मार्च 2015 तक की नौकरी के लिए उनके 24000 रुपये बतौर सिक्योरिटी काटे गए हैं।
सिक्योरिटी काटने को विभागीय अधिकारी भी गलत बता चुके हैं। इसके बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही। जिले में कार्यरत 160 कंप्यूटर अध्यापकों की करीब 6 माह की एक करोड़ 15 लाख रुपये से ज्यादा की राशि बकाया है।
जिसके लिए वे अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं। अब सभी विधायकों एवं मंत्रियों को भी ज्ञापन दे रहे हैं। ताकि कहीं न कहीं उनकी सुनवाई हो सके।
मंत्री रणदीप सुरजेवाला एवं माजरा को दिया ज्ञापन: रविवार को हनुमान वाटिका में जिला प्रधान शिवदत्त शर्मा की अध्यापकों की बैठक हुई।
इसके बाद मंत्री रणदीप सिह सुरजेवाला व कलायत के विधायक रामपाल माजरा के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा है।
जिला प्रधान ने कहा कि एम टेक, बी टेक, एमसीए की डिग्री धारक कंप्यूटर अध्यापकों का शिक्षा विभाग की ओर से निजी कंपनियों के माध्यम से शोषण किया जा रहा है।
कंपनियां सिक्योरिटी के रूप में 24000 रुपये व वेतन की राशि हड़पे हुए हैं। सरकार द्वारा दो माह का पैसा जारी किया जा चुका है।
लेकिन कंपनी अधिकारी कहते हैं कि जब विभाग से पैसा आएगा तभी उन्हें वेतन दिया जा सकेगा। उन्होंने ज्ञापन से मांग की है कि अगर सरकार शिक्षा विभाग कंप्यूटर स्तर की शिक्षा में सुधार लाना चाहती है तो वह इन कंपनियों को बाहर का रास्ता दिखाए। क्योंकि स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा पर हजारों के खर्च के बावजूद भी स्थिति ज्यों की त्यों ही है।
उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों की तरह पॉलिसी लागू किए जाए व कंपनी के द्वारा शिक्षकों से 2250 रुपयों की अवैध वसूली पर रोक, समय पर वेतन देने, पीएफ काटने, ईएसआई के नाम पर अवैध कटौती पर रोक जैसी मांगों पर ध्यान दिया जाए। मौके पर प्रदीप, अनूप, पंकज, मनोज, सुरेश, रमेश, राजीव, केशव, विनोद अन्य कंप्यूटर अध्यापक मौजूद थे।
प्रोजैक्ट मैनेजर अनिल शर्मा से सीधी बातचीत
सवाल: शर्मा जी! कैथल में कार्यरत 160 कम्प्यूटर अध्यापकों को वेतन क्यों नहीं मिल रहा..
जवाब: नहीं-नहीं, हम ऐसे बात नहीं करेंगे, हम ऑफिस में ही बात कर सकते हैं। हमें क्या पता आप कौन बोल रहे हैं, कहां से बोल रहे हैं?
सवाल: आपको जिस नंबर से कॉल की गई है, इसकी वेरिफिकेशन करा लें लेकिन वेतन न मिलने का कारण क्या है?
जवाब: नहीं जी! हम ऐसे बात नहीं करेंगे, थैंक्यू। (फोन काट देते हैं)