गुहला-चीका। अनाज मंडी में धान की आवक बढ़ने लगी है। इस बीच मार्केट कमेटी प्रशासन की ओर से मंडी के कई गेटों को बंद कर ताले लगाने के फैसले से आढ़तियों में रोष पैदा हो गया है। शुक्रवार को आढ़तियों ने मंडी में एकत्रित होकर मार्केट कमेटी प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और गेट बंद करने के फैसले पर विरोध जताया। आढ़तियों ने चेतावनी दी कि यदि 24 घंटे के भीतर मंडी के गेट नहीं खोले गए तो वे हड़ताल का बिगुल बजाने को मजबूर होंगे।
प्रदर्शन कर रहे आढ़तियों राजकुमार जाखौली, राजेश कुमार, अजय कुमार, मिनका, मुकेश कुमार, सुभाष चंद सहित अन्य ने कहा कि धान के सीजन के दौरान मंडी में किसानों और व्यापारियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। ऐसे समय में मंडी के गेटों पर ताले लगाना व्यवस्था को सुचारू करने के बजाय परेशानी को बढ़ाने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि सीजन के दौरान पहली बार इस प्रकार मंडी के गेट बंद किए गए हैं जिससे किसानों को अपनी फसल मंडी तक पहुंचाने और आढ़तियों को अपने कारोबार से संबंधित कार्य करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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आढ़तियों ने कहा कि मंडी में आने-जाने के लिए पर्याप्त रास्ते उपलब्ध नहीं होने के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। धान लेकर पहुंचने वाले किसानों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। उनका कहना था कि धान का सीजन अभी शुरुआती दौर में है और आने वाले दिनों में आवक और अधिक बढ़ने की संभावना है। ऐसे में यदि गेट बंद रहे तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने मार्केट कमेटी प्रशासन से मांग की कि किसानों और आढ़तियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंडी के सभी गेट खोले जाएं और आवागमन की व्यवस्था सामान्य की जाए। आढ़तियों ने कहा कि मंडी में व्यवस्था बनाए रखने के लिए यदि सुरक्षा संबंधी कोई समस्या है तो उसका समाधान अन्य तरीकों से किया जा सकता है, लेकिन गेट बंद करना उचित नहीं है। आढ़तियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने 24 घंटे के भीतर गेट खोलने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया तो वे सामूहिक रूप से हड़ताल का निर्णय ले सकते हैं।
धान की आवक बढ़ने पर खोले जाएंगे गेट
कमेटी सचिव सतबीर राविश ने कहा कि फिलहाल मंडी में धान की आवक काफी कम है। जैसे-जैसे धान की आवक बढ़ेगी, मंडी के सभी गेट खोल दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि धान की चोरी को रोकने के उद्देश्य से फिलहाल कुछ गेट बंद किए गए हैं।
धान सीजन में मंडी के गेट बंद को लेकर नारेबाजी करते हुए आढ़ती। संवाद