संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के तहत भाई उदय सिंह किला परिसर में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों तथा शहर वासियों ने श्रीमद्भगवद् गीता के 18 श्लोकों का सामूहिक उच्चारण कर कार्यक्रम स्थल को गीता ज्ञान के रंग में रंग दिया।
किला परिसर में एकत्रित 500 बच्चों, अधिकारियों, कर्मचारियों सहित मौके पर मौजूद हजारों लोगों को संस्कृत प्राध्यापक रोहित शर्मा व जीओ गीता परिवार एवं एडवोकेट दिनेश पाठक ने सामूहिक श्लोकोच्चारण करवाया। इसके अलावा शिक्षा विभाग के सौजन्य में जिले भर के स्कूलों से ऑनलाइन कुल 4500 बच्चों ने इस श्लोकोच्चारण कार्यक्रम में शिरकत कर गीता के 18 श्लोकों का उच्चारण किया।
कार्यक्रम में कैथल एसडीएम अजय कुमार ने बतौर मुख्य अतिथि व मौलिक शिक्षा अधिकारी सरोज दहिया ने बतौर विशिष्ट अतिथि के तौर पर शिरकत की। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि गीता जयंती महोत्सव गीता ज्ञान को घर-घर तक पहुंचाने का सबसे अच्छा माध्यम है, जो हर उम्र के लोगों को प्रेरित करेगा। हरियाणा की धरा हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संजोए हुए है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कर्म एवं मानवीय जीवन मूल्यों का जो उपदेश दिया था, वह सदियों तक मानव जाति का मार्गदर्शन करता रहेगा। श्रीमद्भागवत का भारतीय संस्कृति, धर्म एवं दर्शन पर गहरा प्रभाव रहा है। जो व्यक्ति गीता का अनुसरण कर लेता है, उसे सुख में ज्यादा सुख और दुख में ज्यादा दुखी होने की आवश्यकता नहीं रहती। वह समभाव में जीवन को उत्साह संग जीता है।
राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, शैमरॉक स्कूल सहित कई स्कूलों के बच्चों ने श्लोकोच्चारण कार्यक्रम में भाग लिया। बच्चों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। वहीं, ओपन स्टेज पर बच्चों ने धार्मिक प्रस्तुतियां देकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। सभी बच्चों को प्रसाद वितरित किया गया।
ढाेल और गानों पर झूमने लगे स्कूली बच्चें
जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव में बच्चों ने प्रदर्शनी को देखने के साथ-साथ वहां स्टेज पर ढोल व गानों की धुनों पर थिरकते नजर आए। वहीं श्री श्याम रसोई जो बिना प्रोफिट व बिना लोस के अपना खाद्य लजीज व्यंजन दर्शकों को उपलब्ध करवा रही थी। अन्य विभागों की स्टॉलों पर जाकर शहर वासी जानकारियां हासिल कर रहे थे। पहली और आखिरी स्टॉलें धार्मिक थी, जहां पहली में श्री कृष्ण कृपा सेवा समिति और बाद में ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय महाविद्यालय के सदस्य अध्यात्म का प्रचार-प्रसार कर रहे थे।