सर्दी का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। न्यूनतम तापमान 8 से घटकर 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम वैज्ञानिक इसी सप्ताह पाला जमने की संभावनाएं जता रहे हैं। ठंड के बढ़े प्रकोप का जन-जीवन पर गहरा असर हुआ है। सड़कों पर दिन में दोपहिया वाहन चालकों की संख्या कम हो गई है। ठंड के साथ-साथ शीतलहर ने लोगों को घरों में दुबकने को विवश कर दिया है। अगर हवा की गति में और ज्यादा तेजी आती है तो उससे ठंड और भी अधिक होगी, लेकिन अगर हवा कम होती है तो पाला पड़ना निश्चित है।
बुधवार को भी सुबह से लेकर रात तक ठिठुरन भरी सर्दी पड़ी। सुबह के समय कोहरा के कारण सूर्यदेव के भी दर्शन नसीब नहीं हुए। हालांकि दिन में कुछ समय के लिए हल्की धूप भी निकली लेकिन सर्दी से कोई राहत नहीं मिली। बुधवार को जिले का अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान चार डिग्री सेल्सियस के करीब रहा। वहीं 11 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से चली शीतलहर में 52 प्रतिशत तक नमी बनी रही। वाहन चालक गर्म कपड़ों में लिपटे दिखाई दिए।
पाला जमने के आसार- कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने कहा कि जिस तरह से तापमान लगातार कम हो रहा है, उस हिसाब से इस सप्ताह पाला जमने की प्रबल संभावना बनी हुई है। अगर पाला पड़ता है और धूप भी कम रहती है तो तापमान और ज्यादा नीचे आएगा और ठंड में भी बढ़ोतरी होगी।
ठंड व कोहरे के कारण वाहनों की गति हुई धीमी- बुधवार को सुबह कोहरे के कारण विजिबिलिटी 40 मीटर के आसपास रही। जिस कारण वाहन चालकों को को परेशानी का सामना करना पड़ा। दोपहिया वाहनों पर भी ठंड का पूरा असर दिखाई दिया। आगामी दिनों में ठंड और बढ़ेगी।
दुकानदारों ने हाथ सेंकने के बाद काम किया शुरू- दुकानों पर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले दुकानदार पहले अलाव जलाकर हाथों को सेंकते दिखाई दिए। उसके बाद दिनचर्या शुरू की। मैकेनिक भूपेंद्र सिंह, अर्जुन, मनोज व राम सिंह ने बताया कि वे शहर में गांवों से अपनी दुकानों पर सुबह नौ बजे के आसपास आते हैं। बाइक पर आते समय हाथों में दस्ताने न हो तो सुन्न की स्थिति रहती है। इसलिए अलाव जलाकर हाथ सेंके और फिर दुकान खोली।
पाला पड़ा तो फसलों को भी होगा नुकसान -कृषि विज्ञान केंद के वैज्ञानिक डॉ. रमेश वर्मा ने बताया कि वैसे तो ठंड गेहूं व अन्य फसलों के लिए लाभदायक है। अगर पाला पड़ता है तो फसल को नुकसान भी हो सकता है। ज्यादा ठंड या पाले का सब्जियों की फसल पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। पशुचारे के लिए उगाई गई फसलों को नुकसान नहीं होगा।
बुधवार सुबह धुंध के साथ ठंड भी बहुत अधिक बढ़ गई थी। पिछले दो तीन दिनों से सुबह के समय धुंध और ठंड अधिक होती है और दोपहर होते होते ठंडक कुछ कम होती है। सुबह और शाम के समय दुकानदार भी काम कम होने के कारण अलाव सेंकते नजर आते हैं।
सर्दी के मौसम में शहर में यदि किसी को रात को सिर छुपाने के लिए छत न मिले तो उनके लिए रैन बसेरा एक सहारा हो सकता है। कैथल में महर्षि वाल्मीकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निकट नगर परिषद द्वारा बनाए गए रैन बसेरा में 50 व्यक्ति एक समय में ठहर सकते हैं। यहां बिस्तर, शौचालय सहित सभी तरह की सुविधाएं हैं। यहां नियुक्त कर्मचारी रत्न सिंह ने बताया कि यहां दो माह से हर रोज दो या तीन लोग रात बिताने के लिए आ रहे हैं। यहां शौचालय, पानी, बिजली, बिस्तर सहित सभी तरह की सुविधाएं हैं। यहां तक की इन्वर्टर तक की भी सुविधा है।
बस अड्डा व रेलवे स्टेशन से दूरी व रसोई की है अभी समस्या- रैन बसेरा में अभी भोजन बनाए जाने की सुविधा नहीं हैं। दूसरा यह नए बस अड्डे सहित रेलवे स्टेशन से काफी दूर है। जिस कारण लोगों को यहां तक पहुंचने में परेशानी होती है। रैन बसेरे के कर्मचारी के मोबाइल नंबर 9896114263 पर फोन करके संपर्क किया जा सकता है।