कैथल। जनता की सुनवाई के लिए मुख्यमंत्री खिड़की (सीएम विंडो) पर शिकायत निवारण की धीमी प्रक्रिया के कारण लोग परेशान हैं। दिसंबर में शुरूआत के बाद सीएम विंडो पर अब तक 1200 से ज्यादा शिकायतें आ चुकी हैं। केवल 97 शिकायतों का पूरी तरह से निपटान हुआ है।
बाकी शिकायतें या तो अधर में हैं, या फिर विभिन्न कार्यालयों में अधिकारियों की नजर-ए-इनायत के इंतजार में हैं। लंबित शिकायतों में से 765 पर एक्शन लिया गया है। वहीं बताया जा रहा है कि 450 से ज्यादा शिकायतें प्रक्रियाधीन हैं। जिस तेजी से भाजपा सरकार फैसले ले रही है, उसके मुताबिक प्रशासनिक अधिकारी तालमेल नहीं बैठा पा रहे हैं। खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारियों की सुस्त चाल पर अब सरकार ने जवाब तलबी की है। यही कारण है कि अब हर सप्ताह सीएम विंडो पर आने वाली शिकायतों की समीक्षा होगी।
10 शिकायते दीं, एक पर भी कार्रवाई नहीं
सीएम विंडो पर शहर के समाजसेवी सीए सतीश सिंघल अब तक दस शिकायतें दे चुके हैं। उन्होंने कहा कि सीएम विंडों पर शिकायत निवारण प्रक्रिया ठीक नहीं है। यहां से शिकायत उसी अधिकारी को भेज दी जाती है, जिसके खिलाफ शिकायत हो। सिंघल ने कहा कि उन्होंने करीब 10 शिकायतें दी हैं, जिनमें से आज तक एक पर भी जवाब नहीं आया। आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी जगरूप ढुल ने कहा कि उन्होंने 3 शिकायतें दी हैं, जिन पर कार्रवाई नहीं हुई।
ये है शिकायत की प्रक्रिया
लघु सचिवालय में सीएम विंडो के लिए विशेष काउंटर बनाया गया है। जहां क्लर्क को शिकायत दी जाती है। इस शिकायत को मुख्यमंत्री कार्यालय भेजकर संबंधित विभाग में भेजा जाता है। शिकायतकर्ता को शिकायत प्राप्ति एवं इसके बाद समाधान के संबंध में एसएमएस से सूचित किया जाता है। लेकिन समस्याओं के समाधान के इंतजार में लोगों का नई शुरू की गई इस व्यवस्था से विश्वास उठता नजर आ रहा है।
अब हर सप्ताह होगी मॉनिटरिंग
सीटीएम नवीन आहुजा का कहना है कि शिकायतों के निपटान का अंतिम फैसला सीएम सेल में होता है। कितनी शिकायतों का निपटान हुआ है, ये तो वहीं से पता चल सकता है। लेकिन जिला स्तर पर केवल एक्शन टेकन रिपोर्ट भेजी जाती है। जिले से काफी शिकायतों पर यह रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब हर सप्ताह सीएम विंडो पर आने वाली शिकायतों की मॉनिटरिंग होगी। डीसी के नेतृत्व में सप्ताह में एक बार इस बारे में रिपोर्ट जरूर ली जाएगी।