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एक करोड़ से अधिक का कारोबार 25 लाख पर सिमटा

Wed, 23 Nov 2016 12:05 AM IST
ब्यूरो कैथल
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कपड़ा व्यापारियों का कारोबार हुआ ठप - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नोटबंदी के कारण कपड़ा व्यापार औंधे मुंह गिर गया है। अकेले कैथल शहर में हर रोज करीब एक करोड़ से अधिक का कारोबार होता था। जो आज महज 20 से 25 लाख रुपये तक रह गया है। करीब 500 से ज्यादा दुकानदार एवं उनके सहायक इस समय खाली बैठने को मजबूर हैं।
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बाजार में पुराने नोटों का प्रचलन बंद होने से कपड़ा व्यापार केवल नाममात्र का ही रह गया। जब से नोटबंदी हुई है, तभी से कपड़ा बेचने वाले दुकानदारों को ग्राहकों के भारी मंदी की मार झेलना पड़ रहा है। इस समय सर्दी के मौसम की आहट के बाद सभी कपड़ा दुकानदार गर्म कपड़े दुकानों में रखना शुरू कर देते हैं। लेकिन रुपयों के न होने से थोक की खरीदारी काफी कम किया है। जहां व्यापारी माल खरीदने दिल्ली और लुधियाना पूरे सप्ताह जाते थे वहीं वह अब सप्ताह में केवल एक बार ही जा रहे हैं।  

पूरे शहर में कपड़े के करीब 500 दुकानदार हैं। आंकड़ों के मुताबिक 500 में से 200 दुकानदार ऐसे हैं जिनका बड़ा कारोबार है। एक दुकानदार की प्रतिदिन की सेल 20 हजार रुपये के करीब है। इसके मुताबिक 500 दुकानदारों का प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ का कारोबार होता है। लेकिन जब से नोटबंदी हुई तब से यह केवल 20 से 25 लाख, केवल 25 प्रतिशत तक ही सिमट कर रह गया है। इसके साथ ही गुजरात के सूरत से आने वाले माल की आपूर्ति भी ठप हो गई है।
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पुराने नोटों से मिल रही पुरानी वेरायटी
दुकानदार हर्ष ने बताया कि थोक विक्रेताओं से माल लेने जा रहे हैं। लेकिन उनसे पुराने नोटों में पुरानी वेरायटी ही मिल रही है। जरूरत का माल नहीं मिल रहा। जहां बिकने वाला माल लेना होता है। वहां पुरानी करेंसी ही नही चल रही।

बड़े नोटों के प्रचलन बंद होने से 20 प्रतिशत हुआ काम
दुकानदार मोनू ने बताया कि जब से पुराने नोटों का प्रचलन बंद हुआ है तब से ग्राहक केवल 10 से 20 प्रतिशत रह गए हैं। कपड़े के काम में बड़े नोट अधिक प्रयोग होते हैं। इसलिए जब से पुराने नोट बंद हुए हैं तो काम भी नाम मात्र रह गया है।

वेरायटी न होने से ग्राहक लौट रहे वापस
दुकानदार सन्नी ने बताया कि नोटबंदी से एक तो पहले ही काम मंदा है, उसपर ग्राहक दुकानदारों को बड़े नोट दे रहे हैं। लेकिन दुकानदार नहीं ले रहे। अगर कोई ग्राहक छूटे रुपये लेकर आता भी है तो वह वेरायटी मांगते हैं। लेकिन थोक विक्रेताओं द्वारा पुराने नोटों को नहीं चलाए जाने से माल नहीं मिलता जिससे ग्राहक बिना सामान खरीदे वापस लौट जा रहे हैं।
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