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आबादी 1 लाख 75 हजार, सफाई कर्मचारी 400, दो रुपये मिलता है भत्ता, बड़ी नाइंसाफी है साहब

Tue, 09 May 2017 12:56 AM IST
ब्यूरो कैथ्ाल
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आखिर कैसे होगा शहर साफ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शहर में साफ-सफाई के लिए आबादी के हिसाब से कर्मचारियों की संख्या पूरी नहीं हैं। जो हैं, उनमें से भी करीब 50 से 60 की संख्या में कर्मचारियों को बेगार में ड्यूटी करनी पड़ती है। जिस कारण वे सफाई कार्य नहीं कर पाते। करीब दो दशकों से केवल नियमित कर्मचारियों को झाड़ू के लिए 2 रुपये भत्ता मिल रहा है। जबकि कच्चे कर्मचारियों को यह भी नहीं मिलता। जबकि मार्केट में झाड़ू 40 रुपये में मिल रही है। इन कर्मचारियों को भी वेतन के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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आबादी के हिसाब से चाहिए 435 से से अधिक कर्मचारी
कर्मचारी संगठन के अनुसार शहर में वर्ष 2011 की जनगणना में आबादी एक लाख 63 हजार थी। जो आज बढ़कर लगभग 1 लाख 75 हजार से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में यहां करीब 435 से अधिक कर्मचारी चाहिए। लेकिन नियमित कर्मचारी महज 185 हैं। विभाग के पे-रोल पर 30 और कच्चे कर्मचारियों की संख्या भी करीब 185 है। इस तरह से करीब 400 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें से भी 50 से 60 की संख्या में कर्मचारी अधिकारियों व नेताओं के यहां साफ-सफाई, गार्डनिंग व अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इस तरह से शहर में सफाई के लिए 300 से 325 की संख्या में कर्मचारी ही मिल रहे हैं।

बीस सालों से झाड़ू भत्ता 2 रुपये
नियमित सफाई कर्मचारियों को झाड़ू भत्ता महज 2 रुपये मिल रहा है। जबकि महीने में एक बांस की झाड़ू 2 बार बनती है। तीन झाड़ू जोड़कर इसे बनाना पड़ता है। बास के पैसे भी अपने पास से खर्चने पड़ते हैं। कर्मचारियों के झाड़ू पर ही करीब 300 रुपये प्रति माह खर्च हो रहे हैं। अस्थाई कर्मचारियों को ये 2 रुपये भी नहीं मिलते। इस तरह से कर्मचारियों के साथ भद्दा मजाक हो रहा है।
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डस्टबिन की भी भारी कमी
सफाई व्यवस्था की हालत को सुधारने में सार्थक बनने वाले डस्टबिन की भी शहर में भारी कमी है। शहर के अधिकतर क्षेत्रों में डस्टबिन नहीं है। कुछ एरिया में डस्टबिन रखे तो गए हैं। लेकिन उनकी हालत काफी खस्ता हो चुकी है। यह भी गंदगी का एक प्रमुख कारण है।
 
सोलिड वेस्ट मैंनेजमेंट पर कोई काम नहीं
खुराना रोड पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया है। इसके बावजूद भी शहर के अधिकतर प्रमुख चौकों पर गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। जिस कारण पलास्टिक व पालीथिन को वेस्ट मैनेजमेंट में प्रयोग नहीं किया जाता है।

खर्च होती है करोड़ों रुपये की राशि, वेतन के लिए होती है हड़ताल
सफाई के मामले में शहर की सरकार द्वारा हाउस मीटिंग में करोड़ों रुपये की ग्रांट पास की जाती है। नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष सफाई के लिए 10 करोड़ रुपये का बजट पास किया गया है। जो पिछले वर्ष की अपेक्षा दो करोड़ रुपये अधिक है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 के लिए 8 करोड़ रुपये का बजट पास हुआ था।

बजट बढ़ाने के बावजूद भी कर्मचारियों को वेतन के लिए धरने-प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं। कर्मचारी नेता शिव कुमार ने कहा कि सबसे अधिक परेशानी आउट सोर्सिंग के तहत कार्य कर रहे कर्मचारियों की होती है। क्योंकि नगर परिषद में उनके वेतन को लेकर कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता।

शहर में साफ-सफाई की हालत सुधरी है। पूरे देश में शहर सफाई के मामले में 403 से आगे निकल कर 282वें स्थान पर आया है। जिससे इस दिशा में हुए काम का पता चलता है। इस साल भी स्वच्छता अभियान पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों की संख्या, वेतन सहित जो भी खामियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा।
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यशपाल प्रजापति, नगर परिषद चेयरमैन
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