अपने शहर में साफ-सफाई में सुधार तो हुआ है, लेकिन अभी इसमें काफी कुछ किए जाने की आवश्यकता है। शहर मेें अनेकों इलाके ऐसे हैं, जहां साफ-सफाई ना के बराबर होती है और गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। बेजुबान पशु गंदगी खा रहे हैं। इसके साथ ही कुछ कॉलोनियों में ओपन नालों के कारण लोगों को जीना मुहाल हो चुका है। जिसमें गंदगी कभी साफ ही नहीं होती। नगर परिषद में कुल 327 सफाई कर्मचारी हैं। इसके बावजूद भी सफाई को लेकर व्यवस्था बनाने के लिए अभी काफी सुधार की जरूरत है।
डोर टू डोर अभियान चलाया, फिर भी लगे गंदगी के ढेर
बालाजी कॉलोनी निवासी संदीप कुमार ने बताया कि नगर परिषद ने कचरा उठाने के लिए वैनों के माध्यम से डोर टू डोर अभियान चलाया है। लेकिन उसके बावजूद भी शहर में कई स्थानों पर गंदगी के ढेर लगे है। जिसका कई दिनों तक उठान नहीं होता। जिस कारण वह आसपास के वातावरण को दूषित करता है। इसे भयानक बीमारियों के फैलने का भी डर बना रहता है। इसका समाधान होना चाहिए।
डस्टबिन की कमी से जूझ रहे वार्ड
फ्रेंडस कॉलोनी निवासी मदन ने बताया कि शहर में स्वच्छता अभियान के दावे फेल नजर आते है। नगर परिषद सफाई को लेकर चाहे कितने भी कार्य करे लेकिन शहर के अधिकतर वार्डों में कूड़ेदान की भारी कमी देखी जा सकती है। जहां वार्ड की प्रत्येक गली में एक डस्टबिन होना चाहिए। वहीं पूरे में वार्ड में केवल पांच से आठ डस्टबिन होते और कई वार्डों के डस्टबिनों की हालत खस्ता है।
नालों की गंदगी से परेशान हुए
शहरवासी शिवकुमार ने बताया कि शहर के कुछ कॉलोनियों में ओपन नाले हैं, जिस कारण यहां रहने वाले लोगों को भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। शहर के पटियाला बाईपास, ढांड रोड से लेकर बस स्टैंड तक ओपन ड्रेन के कारण यहां रहने वाले लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्योंग से आने वाली ड्रेन को बंद करने की घोषणा सीएम ने की थी। लेकिन इस पर भी रोक लग गई है। इसे कई कॉलोनी के लोग प्रभावित हैं।
सफाई करने के बाद भी लगते हैं कचरे के ढेर
बालाजी कॉलोनी निवासी मनोज कुमार ने बताया कि शहर के कुछ वार्डों में गलियों की सफाई तो की जाती हैं। लेकिन कचरे को एक तरफ इकट्ठा कर दिया जाता है। जो कई दिनों तक ऐसे ही पड़े रहते है। यह केवल सफाई कर्मचारियों की लापरवाही के कारण होता है। इन्हें ठोस दिशा निर्देश देने चाहिए।
शिकायत के बावजूद नहीं उठाते कचरा
एमसी कॉलोनी निवासी श्रवण ने कहा कि वार्ड में कचरा उठाने के लिए कई-कई दिन सफाई कर्मचारी नहीं आते। कचरा उठाने के लिए पार्षद व सफाई दरोगा को शिकायत दी जाती है। लेकिन वे भी इसे अनसुना करते हैं।
ग्रांट में भेदभाव करने का आरोप लगाया
वार्ड नंबर तीन की महिला पार्षद महेंद्रो देवी ने नगर परिषद के चेयरमैन पर ग्रांट में भेदभाव करने का आरोप लगाया। पार्षद ने कहा कि वार्ड में सीवरेज ओवरफ्लो रहते हैं। जिस कारण गंदगी और अधिक बढ़ जाती है। वार्ड में पिछले छह महीनों से कूड़ा उठाने वाली वैन नहीं आ रही।
नगर परिषद ने सफाई ठेकेदार को हटाया
वार्ड नंबर 17 के पार्षद वेद प्रकाश ने कहा कि सफाई का ठेकेदार को नगर परिषद द्वारा हटा दिया गया है। जिस कारण वार्ड के लोगों को सफाई को लेकर काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वे इस समस्या को लेकर डीसी से भी मिले। लेकिन वर्तमान में सफाई की समस्या आ रही है।
लाल बत्ती तो छोड़ दी, अब बेगार लेना भी छोड़ें अधिकारी
एक सफाई कर्मचारी ने नाम ना छापने की शर्त पर कहा कि बेशक अधिकारियों ने लाल बत्ती छोड़ दी है। लेकिन खुद के वीआईपी होने की बात से दूर नहीं हो पा रहे हैं। कई अधिकारियों के घर पर 2 से 3 कर्मचारी काम करते हैं। यदि यही कर्मचारी शहर में साफ-सफाई में काम करें तो निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा। शहर में कुल 327 कर्मचारी हैं।
पिछले एक साल में नगर परिषद की ओर से साफ-सफाई के लिए काफी काम किया गया है। जहां भी कमी है, वहां सुधार किया जाएगा। साफ-सफाई के लिए शहर के लोगों के सहयोग की भी आवश्यकता है।
यशपाल प्रजापति, चेयरमैन, नगर परिषद, कैथल।