जितेंद्र पांचाल
कैथल। जिले में मानसून ने दस्तक दे दी है, लेकिन अभी तक बाढ़ बचाव प्रबंध अधूरे हैं। सिंचाई विभाग की ओर से ड्रेनों की सफाई का कार्य जारी है, लेकिन अभी कार्य पूरा होने में समय लगेगा। ऐसे में अगर बारिश तेज होती है तो रिहायशी क्षेत्र के साथ-साथ ड्रेनों के साथ लगते कृषि क्षेत्र में भी जलभराव की समस्या सामने आ सकती है।
सिंचाई विभाग के अनुसार कैथल जिले में छोटी से लेकर बड़ी 34 ड्रेनें हैं। इनमें कैथल ड्रेन, ग्योंग ड्रेन, मानस ड्रेन, घग्घर क्रीक ड्रेन, पूंडरी ड्रेन, अमीन ड्रेन, दुब्बल लिंक ड्रेन, भाना ब्राह्मण ड्रेन, कसान ड्रेन, डीग लिंक ड्रेन व अन्य कई छोटी ड्रेनें शामिल हैं। विभाग की ओर से इन ड्रेनों की सफाई के लिए चार करोड़ 56 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। इन ड्रेनों पर सफाई का करीब 70 प्रतिशत कार्य ही अभी तक हुआ है। 30-35 प्रतिशत क्षेत्र में सफाई का कार्य अभी तक बाकी है।
हालांकि मई-जून माह में विभाग को सभी ड्रेनों की सफाई सुनिश्चित करनी होती है। इस बार पूरा जून माह बीतने के बाद भी कार्य पूरा नहीं हुआ है। दरअसल, मजदूरों की कमी सफाई में बाधा बन गई। इसी वजह से ज्यादातर ड्रेनें गंदगी से अटी पड़ी हैं। जलखुंभी और अन्य प्रकार की झाडिय़ों के कारण तेज बारिश से पहले ही निकासी व्यवस्था खस्ताहाल में है। अगर जल्द सफाई का कार्य पूरा नहीं हुआ तो आगे तेज बारिश के मौसम में स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है।
सिंचाई विभाग ने पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से पत्राचार कर करीब सवा लाख मनरेगा मजदूरों को ड्रेनों की सफाई के कार्य में लगाया है। ये मजदूर विभाग ड्रेनों पर सफाई का कार्य कर भी रहे हैं। मजदूर देरी से मिलने के कारण भी इस बार सफाई संबंधित कार्य में देरी हुई है। हालात देखकर परेशान जिलावासी जल्द से जल्द ड्रेनों की सफाई करवाकर निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करवाने की मांग कर रहे हैं।
सिंचाई विभाग के अधीक्षक अभियंता मंगत राम गर्ग ने बताया कि जिन ड्रेनों की सफाई मशीन से होनी है, उनका कार्य लगभग पूरा हो चुका है। कुछ ड्रेनों की सफाई मनरेगा के माध्यम से की जानी है। इस बार मनरेगा के मजदूर न मिलने के कारण थोड़ी दिक्कत आई है। अब मजदूर मिल गए हैं। जून माह में ही ड्रेनों की सफाई का कार्य पूरा किया जाएगा। बरसात के मौसम में जिलावासियों के सामने जलभराव जैसी स्थिति नहीं आने दी जाएगी।