कैथल। शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल है। सफाई कर्मचारियों के अभाव में सही तरीके से सफाई नहीं हो रही है। जगह-जगह गंदगी के ढेर हैं। इन ढेरों पर लावारिस पशु मुंह मारते रहते हैं। सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जो कर्मचारी हैं, वे बेगार से परेशान हैं।
काफी संख्या में कर्मचारी नेताओं व अधिकारियों के घरों, फार्म हाउस में काम करने को मजबूर हैं। रात्रि सफाई अभियान के बावजूद सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। उधर, कई दिनों से धरना दे रहे कच्चे कर्मचारियों की भी कोई सुध नहीं ली जा रही है। शहर की जनसंख्या के हिसाब से पूरे शहर में 500 से ज्यादा कर्मचारी चाहिए। लेकिन कैथल में इस समय लगभग 125 पक्के एवं कच्चे कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
शहर में जगह-जगह लगे रहते हैं कूढ़े के ढेर
शहर में अंबाला रोड, छात्रावास रोड, सब्जी मंडी, तलाई बाजार, सर्राफा बाजार, प्रताप गेट, महादेव कॉलोनी, सिरटा रोड, अर्जुन नगर, सीवन गेट, कमेटी चौक, खुराना रोड, सुभाष नगर में जगह-जगह गंदगी ढेर लगे हैं। शहर वासियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शहर वासी डा. ओपी सैनी, कमल गुप्ता, अनुज कुमार, पुनीत तितरम, अशोक कुमार, सतीश सैनी, जितेन्द्र कुमार, कृष्ण शर्मा, पवन शर्मा, रजत कुमार ने बताया कि शहर में कूढ़े के ढेर जगह-जगह और मुख्य चौक-चौराहों पर देखे जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि शहर की कई ऐसी कॉलोनियां है, जहां पर लोगों को घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो गया है।
नहीं हो रही हमारी सुनवाई : यूनियन
कर्मचारी यूनियन के प्रधान शिवचरण ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की मांगों पर सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। 12 मई से कर्मचारी धरने पर बैठे है। उन्होंने बताया कि शहर की आबादी के अनुसार 500 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है। लेकिन शहर में कुल 342 कर्मचारी हैं, जिसमें से 76 कर्मचारी धरने पर हैं। उन्होंने बताया कि वह काफी लंबे समय से कर्मचारियों पक्का करने की मांग कर रहे है।
कम हैं सफाई कर्मी : नपा
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी एसके गोयल ने बताया कि आबादी के अनुसार सफाई कर्मचारियों की संख्या कुछ कम है। कुछ कर्मचारी धरने पर है। उन्होंने बताया कि शहर में जिन स्थानों पर सफाई नहीं हो रही है। उन स्थानों की सफाई करवा दी जाएगी। नगर परिषद अध्यक्ष राम निवास मित्तल ने बताया कि नगर परिषद में सफाई कर्मचारी कम हैं। शहर की जनसंख्या का देखते हुए सरकार ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती करनी चाहिए। मांगों को लेकर सफाई कर्मचारी पिछले काफी दिनों से धरना दे रहे है।
शहर की सफाई के लिए 12 करोड़ का बजट
महाबीर जनकल्याण ट्रस्ट के संयोजक पुनीत चौधरी ने बताया कि शहर की सफाई के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट है। फिर भी शहर में सफाई व्यवस्था बहुत खराब है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों के वेतन का चार करोड़ रुपये जाते हैं। लेकिन 8 करोड़ रुपये का आरटीआई में भी कोई जवाब नहीं दिया गया है। उन्होंने बताया कि जो कर्मचारी वार्ड के अनुसार लगाए गए हैं। उन्हें ठेकेदारों ने घर पर बैठा रखा है और कमीशन वसूला जा रहा है।