कैथल। जिला नागरिक अस्पताल को जल्द ही आईसीयू की सौगात मिल जाएगी। पिछले करीब डेढ़ साल से यहां पर जारी निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। अब आचार संहिता हटने के बाद इसका उद्घाटन किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने आईसीयू में 32 बेड लगाएं गए हैं, इसमें से 12 बच्चों के लिए हैं। आईसीयू की शुरूआत होने के बाद जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाएंगी।
जिला नागरिक अस्पताल में आईसीयू की सुविधा शुरू होने से बच्चों के इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ व रोहतक लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्पताल में आईसीयू को शुरू करने से पहले इसका निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए जिला बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. अनिल अग्रवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में बीएमई मनीषा, स्टोर कीपर अमित कुमार को शामिल किया गया है। अगले सप्ताह ये कमेटी आइसीयू का दौरा करेगी। इस कमेटी की रिपोर्ट के बाद उच्चाधिकारियों की ओर से आईसीयू को शुरू करने के संबंध में फैसला लिया जाएगा।
इलाज के लिए दूसरे जिलों में नहीं जाना पड़ेगा
जिला नागरिक अस्पताल में आईसीयू का निर्माण होने के बाद दूसरे जिलों में इलाज के लिए नहीं जाना पड़ेगा। जिला मुख्यालय पर ही मरीजों को इलाज की सुविधा मिल सकेगी। दूसरी मंजिल पर बनाए आईसीयू में चार वेंटिलेटर बेड और आठ एचडीयू बेड शामिल किए गए हैं। पीडियाट्रिक आइसीयू को आक्सीजन प्लांट के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि हर बेड पर ही ऑक्सीजन दाखिल बच्चों को उपलब्ध हो सके। इसके अलावा आईसीयू में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर, इनफ्यूजन पंप, मल्टी पैरा मीटर मानीटर, पल्स आक्सीमीटर, लेरिगोस्काप सहित एक दर्जन से अधिक उपकरण लगाए जाएंगे। यहां चिकित्सक व पैरा मेडिकल स्टाफ की नियुक्ति 24 घंटे रहेगी। इसके साथ आठ बेड का एक अन्य आईसीयू भी अस्पताल में बनकर तैयार हो चुका है, इस आईसीयू के भी जल्द से जल्द शुरू होने की उम्मीद है। अब नागरिक अस्पताल में यह सुविधा जिला अस्पताल में न होने से गंभीर बीमार मरीजों को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ या रोहतक जाना पड़ता है। इसमें समय के साथ-साथ आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ती है।
विशेषज्ञ डाॅक्टरों के रिक्त पदों पर नियुक्ति न होने से बढ़ेगी परेशानी
इस समय नागरिक अस्पताल में विशेष बीमारियों के चिकित्सकों की कमी है। विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण मरीजों को इलाज के लिए काफी दिक्कत आती है। अस्पताल में अब स्वीकृत पद 55 हैं, लेकिन कार्यरत मात्र 15 चिकित्सक हैं। बेहोशी का स्थाई चिकित्सक नहीं है। एनएचएम के तहत दो चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। पूरे जिले में सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक है, जबकि कम से कम पांच बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की है। वहीं एसएनसीयू के लिए भी विभाग के पास अलग से चिकित्सक नहीं है। यहां अनुबंध पर दो चिकित्सक कार्यरत हैं। 22 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कोई भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं है।
वर्जन-
जिला नागरिक अस्पताल में पीडियाट्रिक आईसीयू के इस माह शुरू होने की उम्मीद है। आईसीयू के निरीक्षण को लेकर बाल रोग विशेषज्ञ की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई है। टीम दौरा करने के बाद रिपोर्ट देगी, ताकि कमियों को पहले ही दूर किया जा सके। इस आईसीयू के शुरू होने से बच्चों के इलाज को लेकर सुविधा मिलेगी।
-डाॅ. सचिन मांडले, जिला प्रधान चिकित्सा अधिकारी, जिला नागरिक अस्पताल, कैथल।
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