जहां पूरे देश में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर कुछ लोग असंतोष जाहिर कर रहे हैं, वहीं 2006 से लेकर आज तक भारत की नागरिकता को तरस रहे खरकड़ा निवासी कमलेश की खुशी का ठिकाना नहीं रहा है। उसका पाकिस्तान में शमीम नाम था और अपने माता-पिता के साथ 2006 में पाकिस्तान से 30 दिन के वीजा पर भारत में आई थी और पाकिस्तान में हो रहे जुलमों से खौफजदा होकर दोबारा पाकिस्तान वापिस नहीं गईं। खरकड़ा में अमर उजाला से बातचीत करते हुए उसने बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने उन्हें ऐसा तोहफा दिया है जिसने उनका जीना सार्थक कर दिया है। उन्होंने बताया कि वह हिंदू है लेकिन वहां अपना नाम शमीम रखा था। यहां आकर कमलेश रखा। पाकिस्तान में न तो उन्हे पढ़ने दिया जाता था और ना ही खेत में घास फूंस लगाने की इजाजत थी। हिंदू महिलाओं के साथ शारीरिक शोषण भी होता था। कमलेश के पिता सोना राम से दूरभाष पर बात करने पर उन्होंने बताया कि वह अपने 24 सदस्यों के परिवार सहित पाकिस्तान से 30 दिन का वीजा लेकर हिंदुस्तान आए थे। उसके बाद दोबारा पाकिस्तान नहीं गए। सोना राम ने बताया कि पाकिस्तान में हम लयेया में रहते थे। हमने अलग-अलग जगहों से वीजा लगवाकर भारत आने का प्रावधान किया। कुछ वीजा लयेया जिला से बनवाया और कुछ भावलुर से बनवाकर हम भारत पहुंचे। हमारी बेटियां स्कूल में नहीं जा सकती थीं, घर से बाहर नहीं जा सकती थीं। हमारे पर बहुत अत्यचार होता था, इस डर के मारे हमने उस देश को छोड़ना ही बेहतर समझा। हम दिल्ली आ गए और एक रात वहां रहकर हम रोहतक आ गए जहां एक आश्रम में शरण ली, यह आश्रम भाजपा द्वारा चलाया जाता है। अगले दिन हम डीसी से मिले, हमने पाकिस्तान जाने से मना कर दिया और हमने कहा कि हम दोबारा पाकिस्तान नहीं जाएंगे। बेशक वहां हमारी सात-आठ किले जमीन थी, जानवर भी पाल रखे थे, लेकिन हम यहां मजदूरी कर लेंगे, परंतु दोबारा पाकिस्तान नहीं जाएंगे। उन्होंने बताया कि 2007 में कमलेश की शादी हमने कैथल जिला के खरकड़ा गांव में और उसकी बहन की शादी प्यारो बाई की शादी पोलड़ में की थी। नया नागरिकता कानून बनने से पहले हमें बार-बार अपनी वेरिफिकेशन करवाने हेतु पुलिस थाने जाना पड़ता था, कई बार पुलिस घर पर भी आकर वेरिफकेशन करती थी। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार द्वारा नया नागरिकता बिल लागू करने से हमें जीने का अधिकार मिल गया है। अब हम अमन से इस देश के नागरिक बनकर जीवन यापन कर सकेंगे और हमें पाकिस्तान वापिस जाने का डर भी नहीं सताएगा, क्योंकि पिछले 13 वर्षों से हम पाकिस्तान वापिस भेजने के डर से सहमे रहते थे। इस बिल ने हमें जिंदा कर दिया है। पति सोहन लाल ने कहा कि 2007 में मेरी शादी कमलेश देवी से हुई थी। अब मोदी सरकार के इस फैसले से जिसके तहत इन्हें नागरिकता मिली है तो इसे भारत के नागरिक के सम्मान सारे अधिकार मिल जाएंगे और यह पाकिस्तान वापिस भेजने के डर से मुक्ति पा चुकी है।