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जिला परिषद की 5 करोड़ 80 लाख की ग्रांट को जारी करना बताया बड़ा घोटाला

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city council - फोटो : Kaithal
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। जिला परिषद चेयरपर्सन सुखविंदर कौर की अनुशंसा पर परिषद के अधिकारियों द्वारा पिछले सप्ताह जारी की गई 5 करोड़ 80 लाख की ग्रांट का विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। वीरवार को जिला परिषद के 11 भाजपा, एक इनेलो व एक जजपा समर्थक जिला पार्षदों ने मीडिया सेंटर ग्रांट वितरण को गलत बताया और जारी की गई ग्रांट को वापस लेने की मांग कर चेयरपर्सन, वाइस चेयरपर्सन सहित जिला परिषद के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
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पत्रकारों से बातचीत करते हुए अंजू जागलान, भाग सिंह खनौदा, प्रतिनिधि संजय जागलान, प्रतिनिधि एडवोकेट जयप्रकाश सहित अन्य पार्षदों ने कहा कि 25 फरवरी की बैठक में जिला पार्षदों ने अंजू जागलान को सभी तरह के ग्रांट वितरण का अधिकार दे दिया गया था। कोरोना काल के बीच पिछले माह पार्षद अधिकारियों से मिले और ग्रांट वितरित करने की मांग की। जिला परिषद सीईओ ने विभाग के अधिकारियों से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा। जब 13 जुलाई को विभाग ने स्पष्ट कर दिया कि ग्रांट 25 फरवरी 2020 की बैठक के अनुसार जारी की जाएगी। उसी दिन चेयरपर्सन सुखविंदर कौर, वाइस चेयरमैन मनीष कठवाड़ जिला परिषद के सीईओ, डीडीपीओ जसविंदर सिंह सहित परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलीभगत करके 13 और 14 जुलाई को सभी ब्लॉकों में ग्रांट भेज दी। इसमें सबसे बड़ी हैरानी की बात है कि मंत्री कमलेश ढांडा के हलके में केवल 5 लाख रुपये की ग्रांट दी गई। इससे स्पष्ट है कि विधायकों सहित मंत्री को भी जिला परिषद के दरकिनार करते हुए इस ग्रांट में बड़ा भारी घोटाला किया है इससे पूर्व उन्होंने इस को सरकारी बैंक से निकाल कर निजी बैंक में डाला। इसके बाद बीडीपीओ के खातों में यह राशि भेज दी। एक बीडीपीओ सुरेंद्र शर्मा ने 1.43 करोड़ रुपये की राशि खर्च भी कर दी। सवाल उठता है कि रातों रात कौन सी गली बन गई? कैसे उसकी एमबी भर दी गई? कैसे उसके बिल पास हो गए? और ठेकेदार को भुगतान भी हो गया? उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि पूंडरी हलका के कुछ सरपंच व ठेकेदार चेयरपर्सन को कमीशन देकर ग्रांट लेते हैं। जिस कारण उन्हें सबसे ज्यादा ग्रांट मिली है।
उन्होंने डीसी को शिकायत दी। साथ ही विधायक लीलाराम ने भी इस बारे में डीसी को लिखित में शिकायत देकर इस ग्रांट वितरण में गड़बड़ी को रोकने का आग्रह किया। जिस पर डीसी ने स्पष्ट आदेश जारी किए थे कि जारी की गई ग्रांट को वापस लिया जाए और इसे खर्च ना किया जाए। इसके बावजूद भी इन्होंने ग्रांट वितरण को जारी रखा और उसे खर्च किया जा रहा है। इसलिए उनकी मांग है कि इस मामले में घोटाला करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों सहित जिला परिषद के सदस्यों के खिलाफ जांच करके उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, विजिलेंस सहित विभिन्न जगहों पर शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की ह।
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उनकी मांग है कि जिला परिषद सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच करके उचित कार्रवाई की जाए और इन्हें तुरंत प्रभाव से सस्पेंड किया जाए। अंजू जागलान ने कहा कि बाकि बची हुई ग्रांट को भी इसी तरह खर्च करने के लिए आगामी 5 अगस्त को जिला परिषद की बैठक बुलाई गई है। जिसमें उन्हें पूरी आशंका है कि अधिकारियों के साथ मिलकर जिला परिषद में आई हुई ग्रांट को भी इसी तरह खुर्द-बुर्द करेंगे। उनकी मांग है कि 5 अगस्त की बैठक को स्थगित किया जाए। क्योंकि जांच के दायरे में आए अधिकारी बैठक में भाग ले सकते हैं?
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य सुदेश रानी, संदीप कोटडा, पतासो देवी, सुमन रानी, मोसिया, रेनू बाला, भाग सिंह खनोदा, सुरजीत सिंह, नीलम देवी, मंजू रानी व कमलेश देवी मौजूद थे।
इस संबंध में सीईओ जिला परिषद मीनाक्षी दहिया स्पष्ट कर चुकी हैं कि ग्रांट पहले भी नियमानुसार वितरित की गई थी। डीसी द्वारा एडीसी महोदय को जांच दी गई है। जैसे आला अधिकारियों के निर्देंश होंगे, उसी अनुसार कार्रवाई की जाएगी। मिलीभगत, घोटाले जैसे सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
वहीं जिला परिषद चेयरपर्सन सुखविंद्र कौर ने कहा कि नियमानुसार ग्रांट का वितरण किया गया है। घोटाले के आरोप पूरी तरह से निराधार है। ग्रांट की राशि थी, सरकारी खाते से सरकारी खाते मेें गई है और विकास कार्याें पर खर्च होनी है। तो घोटाला कहां हो गया? यदि विकास कार्य रोकने का प्रयास किया गया तो वे मुख्यमंत्री से मिलकर पूरी बात रखेेंगे। ताकि विकास कार्यों में कोई कमी ना रहे।
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