संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल/सीवन/कलायत। शहर के माता मंदिरों में सोमवार को मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। सुबह पांच बजे से ही श्रद्धालु मंदिर में पहुंचना शुरू हो गए थे। श्रद्धालुओं ने मंदिरों में माता की प्रतिमा को नारियल चुनरी चढ़ाकर सुख शांति की कामना की।
प्राचीन छोटी और बड़ी देवी मंदिर के अलावा श्री ग्यारह रुद्री मंदिर, श्री सनातन धर्म मंदिर और सेक्टर-19 के शिव में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और कतार में लगकर मां दुर्गा की स्तुति कर रहे हैं।
सीवन के प्रसिद्ध महंत अवध बिहारी ने चतुर्थ नवरात्र पर अपने आश्रम में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर उन्होंने चौथे नवरात्र के महत्व पर प्रकाश डाला। यह दिन विशेष रूप से भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि मां कूष्मांडा सृजन शक्ति की प्रतीक हैं।
मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी हल्की मुस्कान से सृष्टि का निर्माण किया था। कहा कि मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। इनके आठ हाथ होते हैं, जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और एक हाथ में जप माला होती है। इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। मां का वाहन सिंह होता है, जो उनकी शक्ति और साहस का प्रतीक है।
विशेष रूप से मां कूष्मांडा को मालपुआ या हलवे का भोग लगाया जाता है। इस दिन दुर्गा सप्तशती या देवी महात्म्य का पाठ करना चाहिए। उन्होंने मां कुष्मांडा की महिमा के बारे में बताया कि मां कुष्मांडा की पूजा से व्यक्ति के जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि और समृद्ध जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि मां कूष्मांडा भक्तों के सभी कष्टों और रोगों का नाश करती हैं और उन्हें सुख-शांति प्रदान करती हैं।
उन्होंने बताया कि मां के आशीर्वाद से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मां कूष्मांडा की पूजा के दिन साधक को अहंकार, क्रोध, लोभ, और मोह से दूर रहकर मन, वचन और कर्म से पवित्र रहना चाहिए। मां की कृपा से साधक के सभी विघ्न और बाधाएं समाप्त होती हैं।
कलायत में भी श्रद्धालुओं ने मां कुष्मांडा की उपासना की । मंदिर में मां के दर्शनों के लिए सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ लगी रही। पंडित विशाल शांडिल्य ने बताया की मां कुष्मांडा की पूजा से समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।
शांडिल्य ने बताया की मां कूष्मांडा आठ भुजाओं वाली दिव्य शक्ति धारण मां परमेश्वरी का रूप हैं। मान्यता है कि मां कुष्मांडा की पूजा करने से सभी अभीष्ट कार्य पूर्ण होते हैं।