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Kaithal News: एथलेटिक्स में चीका के खिलाड़ियों ने बनाई खास पहचान

Fri, 20 Dec 2024 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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राजिंद्र तंवर
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कैथल। हरियाणा का एक छोटा सा कस्बा चीका, इस समय यह एथलेटिक्स में अपनी पहचान बना चुका है। यहांं के लगभग 450 एथलीट ने अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और समर्पण से न केवल खेल जगत में अपनी पहचान बनाई, बल्कि सरकारी नौकरियों में भी अपनी जगह हासिल की है। इन खिलाड़ियों ने यह साबित किया कि अगर इरादा मजबूत हो और मेहनत सच्ची हो तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

चीका के युवा खिलाडि़यों के लिए एथलेटिक्स न केवल एक खेल बल्कि जीवन में सफलता की कुंजी बन चुका है। इन खिलाड़ियों ने दिन-रात मेहनत की और अपने कौशल को निखारा और प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनकी सफलता की कहानी सिर्फ उनके व्यक्तिगत प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनके परिवार, कोच और समुदाय की मेहनत का भी नतीजा है। वहीं सरकारी नौकरी पाने के लिए इन खिलाड़ियों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर देश के लिए सैंकड़ों पदक जीते हैं।
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इनकी सफलता न केवल चीका के खिलाड़ियों को प्रेरित कर रही है बल्कि यह पूरे राज्य और देश के लिए एक उदाहरण बन गई है। आज ये खिलाड़ी न सिर्फ खेल के मैदान पर बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में अपनी मेहनत और संघर्ष से सफलता की नई ऊंचाइयां छू रहे हैं। ये देश के विभिन्न राज्यों में सरकारी पदों, आर्मी, सीआरपीएफ, बीएसएफ, रेलवे, शिक्षा विभाग, हरियाणा पुलिस व पंजाब पुलिस में अपनी सेवायें प्रदान कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स कोच डॉ. सतनाम सिंह ने बताया कि वे वर्ष 2011 से एथलेटिक्स नर्सरी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. सतनाम सिंह ने बताया कि वर्ष 2011 में डीएवी कॉलेज चीका के मैदान में एथलेटिक्स का सेंटर तैयार किया था। पहले यहां इस मैदान में बंजर भूमि व चारों ओर झाडिय़ां उगी पड़ी थी तो बड़ी मुश्किल से मैदान स्वयं तैयार करवाया फिर धीरे-धीरे वहां खिलाड़ी यहां अभ्यास करने आने लगे।

उन्होंने बताया कि लगभग तीन वर्ष तक खिलाडिय़ों को वहां अभ्यास करवाया। उसके बाद 2014 से यहां सरकारी नर्सरी चल रही है। शुरुआत में इस नर्सरी में खिलाड़ियों की संख्या कम थी फिर बढ़ती गई ओर धीरे धीरे यहां पर सैंकड़ों खिलाड़ी ने सुबह शाम को अभ्यास करने आने लगे। वैसे इस नर्सरी में 25 लड़के व 25 लड़कियां हैं, लेकिन इसके अलावा यहां वर्ष 08 से 35 आयु वर्ग के लगभग 250 खिलाड़ी प्रतिदिन सुबह शाम अभ्यास करने आते हैं।

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चंडीगढ़ पुलिस में चयनित राज्यस्तरीय खिलाड़ी कुसुम ने कहा कि मुझे इसी नर्सरी में खेल कर सफलता मिली हैं। कोच सतनाम सिंह सुबह शाम कठिन अभ्यास कराने के साथ मार्गदर्शन देते हैं। तमाम पदक जीते हैं।

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सीआरपीएफ में चयनित हुई राष्ट्रीय खिलाड़ी कमलजीत कौर ने बताया कि वे चार बार राष्ट्रीय पदक हासिल कर चुकी हैं। इस नर्सरी में खेल के बलबूते उनका सीआरपीएफ में चयन हुआ। कोच सतनाम के मार्गदर्शन से ही उसे ये सफलता मिली है।

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पैरा एथलेटिक्स अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी माफी ने बताया कि वे इस नर्सरी में सुबह शाम कई घंटे अभ्यास करती हैं। सपना है की देश के लिए खेल ओर पदक जीत कर देश व अपने माता-पिता का नाम रोशन करे।

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एसएसबी में कांस्टेबल के पद पर चयनित राष्ट्रीय खिलाड़ी परमदीप ने कहा वे राष्ट्रीय धावक खिलाड़ी हैं। इस नर्सरी के मैदान पर सुबह शाम मेहनत कर विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लिया ओर देश के लिए पदक जीते हैं। कोच का सहयोग मिलता है।
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हरियाणा पुलिस में चयनित राज्यस्तरीय खिलाड़ी प्रियंका ने बताया कि इस समय वे ट्रेनिंग कर रही हैं। शिक्षा के साथ सुबह-शाम कई घंटे अभ्यास कर विभिन्न प्रतियोगिता में भाग लेकर कई पदक जीत चुकी हैं।
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