साल 2018 में फरल के फल्गू मेले में श्रद्धालुओं के लिए दवाओं की खरीद में हुए हेर फेर के मामले में आयुष महानिदेशक ने रिटायर्ड जिला आयुर्वेदिक अधिकारी और उनके कार्यालय के दो कर्मचारियों को भी कर्तव्यों में कोताही और लापरवाही बरतने के आरोप में हरियाणा सिविल सेवाएं ( दंड एवं अपील ) नियमावली की धारा 8 के तहत चार्जशीट किया है।
बता दें िसाल 2018 में फरल के फल्गू मेले मे श्रद्धालुओं के लिए आयुष विभाग द्वारा 1.50 लाख की दवाईयां अंबाला और कैथल की फर्मों से खरीदी गई थी। इन दवाओं के संबंध में आरटीआई से हासिल जानकारी में गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल रसूलपुर ने बताया कि उन्हें पता चला था कि 106 रुपये की दवा को 136 रुपये में खरीदा गया था। उसने इस मामले की शिकायत सीएम विंडो में की थी। तत्कालीन डीसी द्वारा की गई जांच में आरोप सही पाए गये थे, जिसमें यह बात भी सिद्ध हुई थी कि शिकायत के बाद जिला आयुर्वेदिक अधिकारी ने संबंधित फर्म से दोबारा बिल बना कर वसूली गई राशि पुन: सरकारी खजाने में जमा करवा दी थी। डीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में जिला आयुर्वेदिक अधिकारी व उसके कार्यालय के कर्मचारी को दोषी पाया था और उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई के लिए आयुष महानिदेशक हरियाणा लिखा था। लेकिन एक साल तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद इसकी शिकायत लोकायुक्त हरियाणा को गई। लोकायुक्त का नोटिस आने के बाद अब आयुष महानिदेशक ने रिटायर्ड जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. पूनम वालिया व उनके कार्यालय के दो अन्य कर्मचारियों को भी अपने कर्तव्यों में कोताही तथा लापरवाही बरतने के आरोप में हरियाणा सिविल सेवाएं ( दंड एवं अपील ) नियमावली की धारा 8 के तहत चार्जशीट किया गया है।
आरटीआई कार्यकर्ता जयपाल ने बताया की फल्गू मेले के दौरान जो दवाइयां खरीदी गई थीं, उनके मूल्य चेक करने के लिए जिले के 6 डॉक्टरों की परचेजिंग कमेटी बनाई गई थी जिन्होंने दवाइयों के बाजार से मूल्य चेक किए बिना ही संबंधित फर्म को इस टेंडर की स्वीकृत प्रदान कर दी थी, जिसमे परचेजिंग कमेटी के सभी डॉक्टरों का भी दोष बनता है और उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। जयपाल ने कहा कि वे इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। इस मामले में पुलिस कार्रवाई की मांग की जाएगी।