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Kaithal News: भगवान के नाम का जप करना ही सर्वोत्तम यज्ञ

Sat, 07 Oct 2023 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। इस्कॉन कुरुक्षेत्र व इस्कॉन प्रचार समिति कैथल की ओर से श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन शुक्रवार को श्री कृष्ण जन्मोत्सव मनाया। इस मौके पर पंडाल को भव्य तरीके से सजाया। भगवान श्री कृष्ण के भजनों पर श्रद्धालु झूमे। इसके बाद दही हांडी कार्यक्रम का आयोजन किया। सत्संग में बताया गया कि भगवान के नाम का जप करना ही सर्वोत्तम यज्ञ है।

छठे दिन की कथा में कुरुक्षेत्र इस्कॉन समिति के प्रधान साक्षी गोपाल ने शिरकत की। उन्होंने आए हुए सभी श्रद्धालुओं को भगवान श्री कृष्ण के विषय में बताया। कहा कि, श्रीमद्भागवत गीता के चौथे अध्याय के नौवें श्लोक में श्रीकृष्ण जी कहते हैं कि मेरा जन्म और कर्म दोनों ही दिव्य हैं। उन्होंने कहा कि जो जीव मनुष्य की योनि में आकर मेरे जन्म और कर्म दोनों को जान लेता है, उसे इस योनि में दोबारा नहीं आना पड़ता अर्थात वह जन्म और मृत्यु के चक्कर से मुक्त हो जाता है।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य को शास्त्रों के अनुसार भक्ति के मार्ग पर बढऩा चाहिए। भगवान स्वयं कहते हैं कि जो व्यक्ति मुझे भगवान नहीं मानते वे मूढ़मति के होते हैं। भगवान अपने भक्तों के लिए अनेक रूप लेकर धरती पर आते हैं।

पंडाल में भगवान श्री कृष्ण की जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया। बड़े ही सुंदर रूप से पंडाल को सजाया। पूतना वध पर कहा कि ऐसा कोई साधारण बालक तो नहीं कर सकता। जैसे भगवान ने राम अवतार में राम सेतु बनाया और कृष्ण अवतार में गोवर्धन को अपनी उंगली पर उठाया, ऐसा केवल भगवान कर सकते हैं, क्योंकि वे दिव्य हैं। पूरे संसार में कोई भी ऐसा नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि श्री कृष्ण को भगवान बनाना किसी का काम नहीं है। वे तो स्वयं ही भगवान है। उन्होंने बताया कि भगवान अपने भक्त के द्वारा अर्पण की गई वस्तु का भाव स्वीकार करते हैं। हम अगर भाव से भगवान को तुलसी पत्र भी अर्पण करते हैं तो भगवान उसे भी प्रसन्न हो जाते हैं। हर वर्ग, जाति का व्यक्ति भगवान की भक्ति कर सकता है, चाहे वह अमीर हो या गरीब।

उन्होंने बताया कि एक हमारा मन ही है जो हमें संसार में बांधता है या मुक्ति दिलवाता है। जब हमारा मन विषय भोग में लग जाएगा तो वह बंधन में डाल देगा और इसके विपरीत जब यह भक्ति मार्ग पर चलेगा तो हमें संसार से मुक्ति दिलवा देगा। जिस भी व्यक्ति को अपने मन को सुखी करना है उसे महामंत्र को अपनाना पड़ेगा और महामंत्र वही है जिसमें सभी मंत्र समय हुए हैं। हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।। वेदों शास्त्रों के अनुसार इस कलयुग में मुक्ति पाने का इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है, अन्य कोई भी साधन इससे श्रेष्ठ नहीं है।
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इस अवसर पर इस्कॉन कैथल के प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि पंडाल में पहुंचे श्रद्धालुओं ने कथा के पांचवें दिवस पर आयोजित भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में पीले वस्त्र पहनकर भगवान का स्वागत किया और पंडाल की शोभा बढ़ाई। इस अवसर पर सुरेश गर्ग नौच, बृजमोहन गुप्ता, अभिषेक गुप्ता, मनदीप सिंह एडवोकेट, रवि भूषण गर्ग, विनोद भल्ला, नरेश गर्ग ने ज्योति प्रज्वलित करके और प्रभु का फूलमाला से स्वागत कर कथा का शुभारंभ करवाया।
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