संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। माता गेट स्थित सूर्यकुंड डेरे में ऐतिहासिक काली माता के मंदिर में रविवार रात को चैत्र नवरात्र के दो दिवसीय विश्व प्रसिद्ध मेले की शुरुआत हो गई। इस मेले में 200 से अधिक सेवादार मेले की व्यवस्था संभाल रहे हैं। इसके साथ ही पुलिसकर्मियों की ओर से भी सहयोग किया जा रहा है।
इस डेरे में हर साल चैत्र नवरात्र पर मेला लगता है। रविवार रात से यहां चहल-पहल बढ़ गई है। अब मंगलवार सुबह के समय इस मेले का समापन होगा। वहीं, सोमवार और मंगलवार को सीवन रोड बाईपास से लेकर माता गेट और खुराना रोड से माता गेट का रास्ता बंद कर पुलिस की ओर से रूट को डायवर्ट किया जाएगा। मेले के तहत रविवार शाम के समय ही काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे। मेले में करीब एक लाख लोगों के पहुंचने की संभावना है।
महंत रमन पुरी महाराज ने बताया कि इस डेरे का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा है। यह कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि का तीर्थ है। प्राचीन मान्यता अनुसार महाभारत काल में ज्येष्ठ पांडव पुत्र युुधिष्ठिर ने कैथल में ही नवग्रह कुंडों की स्थापना की थी। इनमें से सबसे बड़ा कुंड सूर्यकुंड के नाम से स्थापित किया गया था। वहीं, यहां पर बाजीगर समाज की कुलदेवी मां काली का मंदिर है। ऐसे में बाजीगर समाज के लोग यहां पर माथा टेकने बाद ही अपने दांपत्य जीवन की शुरूआत करते हैं। महंत ने बताया कि इस मेले में काफी संख्या में सेवादारों की ओर से विशाल भंडारे भी लगाए जाएंगे।