संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिला परिषद में अध्यक्ष पद के चुनाव मामले में सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। अब यह सुनवाई सात अगस्त यानि बुधवार को होगी।
गौरतलब है कि पिछले लंबे समय से जिला परिषद की चौधर की कुर्सी पर भाजपा और जजपा आमने-सामने हैं। वर्तमान में जिला पार्षद दीपक मलिक उर्फ दीप जाखौली जिला परिषद के अध्यक्ष है। प्रदेश में दोनों ही पार्टियों का गठबंधन टूटने के बाद से दोनों पार्टियों के बीच अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर खींचतान लगातार जारी है।
सदन की हर बैठक में होती थी बहस ः जिला परिषद अध्यक्ष व अन्य भाजपा पार्षदों के बीच सदन की हर बैठक में बहस होती थी। इसमें कभी वित्तीय शक्ति, तो कभी ग्रांट वितरण को लेकर आमने सामने दिखाई दिए। लोकसभा चुनावों के बाद से जजपा समर्थित अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर उसे हटाने की रणनीति बनाई। इसके चलते 12 जुलाई को भाजपा समर्थित 15 पार्षदों ने डीसी को अविश्वास का शपथ पत्र दिया।
अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 19 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव के लिए होने वाली मतदान पर रोक लगाने से मना कर दिया, परंतु चुनाव परिणाम घोषित करने के लिए उसके फैसले का इंतजार करने को कहा। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार से इसका जवाब मांगा था। जिला प्रशासन ने अब इस मामले में अपना जवाब पेश किया गया है, जिसमें अविश्वास को संवैधानिक व नियमों के मुताबिक बताया है।
गौरतलब है कि 19 जुलाई को 20 में से 17 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मतदान किया था। अध्यक्ष दीप मलिक के इलावा वार्ड 12 से नेहा तंवर व वार्ड 18 से राकेश खानपुर मतदान करने नहीं पहुंचे थे। इस पूरी प्रक्रिया में प्रशासन की तरफ से एडीसी एवं जिला परिषद सीईओ जया श्रद्धा के साथ डीसी प्रशांत पंवार भी मौजूद थे। पार्षदों की ओर से जिस मत पेटी में वोट डाली गई थी वह जिला खजाना कार्यालय में जमा है।
सांविधानिक तरीके से लाया गया प्रस्ताव : कर्मवीर
अविश्वास प्रस्ताव सांविधानिक लाया गया है। कोर्ट ने जो प्रशासन से जवाब मांगा था उसका जवाब दे दिया गया है, पार्षदों को उम्मीद है की जब भी कोर्ट में सुनवाई होगी तो उनका फैसला उनके हक में आएगा। - कर्मवीर कौल, उपाध्यक्ष, जिला परिषद।
अध्यक्ष ने कोर्ट में यह रखा है पक्ष
अध्यक्ष दीपक मलिक ने अविश्वास प्रस्ताव को संवैधानिक बता हाईकोर्ट को इसमें काफी खामियां बताई हैं। उनके मुताबिक इस प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। डीसी द्वारा अविश्वास के बैठक बुलाने के लिए जो 12 जुलाई को नोटिस जारी किया गया था, वह उनको 16 जुलाई को मिला। इिसके मुताबिक 19 जुलाई को अविश्वास पर मतदान होना था। उसको अपनी तैयारी के लिए केवल तीन दिन मिले जबकि एक्ट अनुसार अविश्वास लाने से पहले संबंधित अध्यक्ष को सात दिन का समय देना अनिवार्य होता है। इस ग्राउंड को आधार बनाते हुए दीपक ने हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखा। जिस पर हाईकोर्ट ने चुनाव करवाने की प्रक्रिया पर रोक तो नहीं लगाई परंतु परिणाम घोषित करने पर स्टे कर दिया है।
इन पार्षदों ने अविश्वास को लेकर किया था मतदान
वार्ड नंबर-एक संजीव ठाकुर
वार्ड नंबर-तीन से रुमिला ढुल
वार्ड नंबर-चार से दिलबाग
वार्ड नंबर-पांच से कमलेश रानी
वार्ड नंबर-छह से अमरजीत
वार्ड नंबर-सात से कमलेश रानी
वार्ड नंबर-आठ से ममता रानी
वार्ड नंबर-नौ से देवेंद्र शर्मा
वार्ड नंबर-10 से सोनिया रानी
वार्ड नंबर-13 से जिप उपाध्यक्ष कर्मवीर कौल
वार्ड नंबर-14 से पिंकी रानी
वार्ड नंबर-15 से मुनीष शर्मा फरल
वार्ड नंबर-16 रितू कुमारी
वार्ड नंबर -18 से मैनेजर कश्यप
वार्ड नंबर-19 से बलजीत कौर
वार्ड नंबर-20 से सुरजीत कौर
वार्ड नंबर-21 से बलवान सिंह