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एक नारी को शिक्षित करने से दो परिवार शिक्षित होते : प्रो. पुष्पा

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कैथल। आरकेएसडी कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से भारतीय ज्ञान परंपरा में हिंदी साहित्य की भूमिका विषय पर विस्तार व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें कुवि के हिंदी विभाग की अध्यक्ष प्रो. पुष्पा रानी मुख्य वक्ता रही। डॉ. पुष्पा रानी ने कहा कि एक नारी को शिक्षित करने से दो परिवार शिक्षित होते हैं।
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उन्होंने सन्यासी, साधना, योगी, साधु की परिभाषा और उनके त्याग से परिचित करवाया। इस मौके पर प्राचार्य संजय गोयल व प्राचार्य प्रभारी डॉ. हरेंद्र गुप्ता और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आरपी मौण ने डॉ. प्रो. पुष्पा रानी का स्वागत किया। प्राचार्य ने मुख्य वक्ता का संक्षिप्त परिचय देते हुए बताया कि उन्होंने 196 कॉन्फ्रेंस में शोध पत्र प्रस्तुत किए व 11 पुस्तकें प्रकाशित की।
कॉलेज के हिंदी विभाग के बारे में कहा कि 1976 से यहां पर स्नातकोत्तर की कक्षाएं शुरू हुई थीं। तब से लेकर आज तक विभाग के विद्यार्थियों की ओर से लगभग प्रत्येक वर्ष विश्वविद्यालय स्तर पर पहली दस पोजीशन में से तीन से चार पॉजिशन आती रही हैं।
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भारतीय ज्ञान परंपरा में हिंदी साहित्य की भूमिका पर विचार करते हुए कहा कि सूरदास ने भगवान कृष्ण का बाल वर्णन, तुलसीदास का रामचरितमानस में श्रीराम का वर्णन अतुलनीय है।
हिंदी भाषा का कॉरपोरेट जगत पत्रिकाओं में एलआईसी में विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ते योगदान से परिचित करवाया। आगे कहा कि प्रेम में कोई स्वार्थ भाव नहीं होता। प्रेम समर्पण है और समर्पण ज्ञान द्वारा ही संभव है। जिसमें हिंदी साहित्य का योगदान अतुलनीय है। इस दौरान विभाग के सदस्य डॉ. विजेंद्र कुमार, डॉक्टर वर्षा, कैलाश, कपिल सिंह, एश्वर्या, गरिमा आदि मौजूद रहे। मंच का संचालन डॉ. बिजेंद्र कुमार ने किया।
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