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कुरुक्षेत्र जाना मुश्किल, वापस आना उससे भी मुश्किल

Fri, 16 Dec 2016 12:10 AM IST
ब्यूरो कैथल
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कुरुक्षेत्र आने-जाने वाले हैं परेशान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कैथल से कुरुक्षेत्र सुबह जहां जाना मुश्किल है, वहीं शाम को वापस आना उससे भी मुश्किल है। सुबह के समय छात्र-छात्राओं को जहां काफी दिक्कतें आती हैं, वहीं दैनिक यात्री काफी परेशान हैं। शाम के समय इससे भी ज्यादा परेशानी होती है, जब बसें ना के बराबर आती हैं। कहने को तो हर दस मिनट में सुबह के समय बस है, लेकिन कई बार तो बसें आधे घंटे तक नहीं मिलतीं। तब तक बच्चे अपने गंतव्य पहुंचने के लिए लेट हो जाते हैं।
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कैथल से हर रोज कुरुक्षेत्र में भारी संख्या में विद्यार्थी व दैनिक यात्री जाते हैं। विश्वविद्यालय होने के कारण यहां जाने वालों की संख्या अन्य रूटों की बजाए काफी ज्यादा है। जिस दिन कोई परीक्षा हो तो यह संख्या और भी ज्यादा हो जाती है। कुरुक्षेत्र की ओर जाने वाली कैथल डिपो की 12 बसें हैं। इसके अलावा यमुनानगर सहित कई डिपो की बसें भी आती हैं। इसके बावजूद सुबह के समय यहां से बस पकड़कर समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

घर से आते हैं जल्दी तो भी हो जाते हैं लेट
गांव सांघन निवासी नवजोत सिंह ने बताया कि वह यूनिवर्सिटी में बीटेक का दूसरे वर्ष का छात्र है। वह अपने गांव से सुबह 6 बजे ही निकल जाता है। जिसके बाद सात बजे के करीब बस अड्डे के पास पहुंच जाता है। लेकिन बसों की कमी के चलते उसे घर से जल्दी चलने के बाद भी आधे घंटे के करीब खड़ा होना पड़ता है। जिसके बाद वह रोजाना लेट हो जाता है। इसके अलावा वापसी में अगर तीन बजे से पहले चले तो बस मिल जाती है। अगर इससे लेट होते हैं तो एक से डेढ़ घंटे का इंतजार करना पड़ता है।
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गांव ककहेड़ी वासी सोमपाल ने बताया कि वह कुरुक्षेत्र में निजी आईटीआई में पढ़ता है। आईटीआई का समय 10 बजे होने के कारण वह घर से सुबह 7 बजे चलता है। कैथल आधे घंटे में पहुंच जाता है। जिसके बाद कुरुक्षेत्र जाने के लिए एक घंटे तक का इंतजार भी करना पड़ता है।

समय सारणी सही नहीं होने से दिक्कतें
एक निजी कंपनी में कार्यरत क्लर्क प्रवीन ने बताया कि उसे भी कुरुक्षेत्र में नौकरी पर जाना होता हैं। लेकिन बसों की कमी के कारण वह प्रतिदिन लेट हो जाता है। यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली छात्रा सुमन गोस्वामी, वंदना, बबीता ने बताया कि सरकार ने प्राईवेट बसों में पास चलाने के आदेश दिए हैं। लेकिन प्राईवेट बस संचालक उन्हें बिना टिकट के बस में यात्रा नहीं करने देते। इसी प्रकार से यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली छात्राओं को सबसे अधिक कठिनाई होती हैं। उन्हें बसों की कमी के कारण अधिक भीड़ का सबसे अधिक सामना करना पड़ता है।

बदलना पड़ता है रूट
छात्रा गुरप्रीत ने बताया कि कुरुक्षेत्र से कैथल की बसों की कमी के कारण उन्हें रूट को बदलकर पिहोवा जाना पड़ता है। पिहोवा से दोबारा कैथल आना पड़ता है। इससे दोगुना समय लगता है।

बसों के फेरे बढ़ाए जाएं
विद्यार्थियों की मांग है कि कैथल डिपो से काफी बसें कुरुक्षेत्र जाती हैं। यदि कुरुक्षेत्र डिपो से भी बसों की संख्या बढ़ा कर उनके फेरे बढ़ाए जाएं तो उन्हें काफी राहत मिल सकती है। विशेष रूप से विश्वविद्यालय आने-जाने के समय को ध्यान में रखकर टाइमटेबल बनाया जाए।

कुरुक्षेत्र रूट पर जाने वाली बसें अपने समयानुसार चल रही हैं। वहां से दोपहर के समय आने वाली अधिकतर बसें कुरुक्षेत्र डिपो की हैं। अगर डिपो का कोई कंडेक्टर या ड्राईवर अपनी मनमर्जी से बस को चलाता है तो उसकी जांच की जाएगी। अभी तक मेरे संज्ञान में मामला नहीं था।
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राजकुमार, जीएम रोडवेज
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