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Kaithal News: उज्बेकिस्तान में स्मृति को कांस्य पदक

Thu, 19 Dec 2024 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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राजिंद्र तंवर
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कैथल। गांव भैणी माजरा की बेटी स्मृति चहल ने उज्बेकिस्तान में हुई सीनियर अंतरराष्ट्रीय कुराश प्रतियोगिता में भाग लेकर कांस्य पदक जीता है। इसके साथ उसे एक हजार डॉलर का नकद कैश अवार्ड भी मिला है। अंतरराष्ट्रीय कुराश प्रतियोगिता में खिलाड़ी स्मृति चहल की जीत पर देश के खेल प्रमियों में खुशी की लहर है। स्मृति की सफलता पर गांव के साथ परिवार में भी खुशी का माहौल है।

यह जानकारी देते हुए कोच जोगिंद्र व संदीप कुमार ने बताया कि मंगलवार को उज्बेकिस्तान में 15 से 17 हुई सीनियर अंतरराष्ट्रीय कुराश प्रतियोगिता में खिलाड़ी स्मृति चहल ने भाग लिया था, जिसमें खिलाड़ी ने अव्वल प्रदर्शन ईरान को पराजित कर कांस्य पदक जीता। साथ ही एक हजार डॉलर नकद अवार्ड मिला है। वह वल्र्ड रेंकिंग में तीसरे स्थान पर आई है। भारत से एकमात्र खिलाड़ी स्मृति चहल को इस प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ था ओर वहां भी मुकाबले में कांस्य पदक जीता था
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गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय कुराश खिलाड़ी स्मृति चहल ने 2023 में उज़बेकिस्तान में कुराश विश्व कप प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। इस प्रदर्शन से उन्होंने अपनी खेल क्षमता का लोहा मनवाया और भारत को गर्व महसूस कराया। स्मृति चहल का यह पदक उनके कठिन परिश्रम और समर्पण का प्रतीक है, जिसने कुराश के खेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक लोकप्रिय बनाने में मदद की है।

अंतरराष्ट्रीय कुराश खिलाड़ी स्मृति चहल ने बताया कि इस प्रतियोगिता से पूर्व इसी वर्ष जून-जूलाई में हुई एशियन चैंपियनशिप में भी कांस्य पदक जीता और पिछले वर्ष दिसंबर में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के आधार पर ही इस प्रतियोगिता के लिए चयन हुआ था। वे भारत से एकमात्र खिलाड़ी हैं।

स्मृति चहल ने बताया कि चार वर्ष पहले जब वे नौंवी कक्षा में पढ़ती तो मेरे फूफा राममेहर जो गांव बालू से हैं वे मुझे स्वास्थ्य के प्रति हुष्ट-पुष्ट रखने के लिए कैथल के छोटूराम इंडोर स्टेडियम में ले गए थे। वहां स्टेडियम में जूडो व कुराश के मुकाबले चल रहे थे। खिलाड़ियों को देखकर उसके मन में यह खेल खेलने की प्रेरणा जागी और कोच संदीप से मिलवाया ओर उसी समय वे कुराश खेल मे शामिल हो गई ओर दिन रात मेहनत कर विभिन्न प्रतियोगिता में भाग लिया ओर वे पदक जीतने लगी। इससे मुझे ओर प्रेरणा जागी ओर वे ओर मेहनत करने लगी। ओर कुराश ही उसका प्रोफेशनल खेल बन गया।

इस समय वे आरकेएसडी कॉलेज में बीए फाइनल में शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। उसका सपना है कि और मेहनत कर देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल करें। वह अपनी शिक्षा के साथ साथ सुबह दो घंटे व शाम तीन घंटे इंडोर स्टेडियम में अभ्यास करती है। ओर मेरे कोच संदीप, कोच जोगिंद्र व मनोज के मार्गदर्शन से ही वह इस खेल में सफलता पा रही है। उसके पिता जयपाल किसान और मां मखनी देवी गृहिणी हैं। वे तीन बहनों वे बड़ी हैं। दो छोटी बहनें अंशी व प्राची है। संवाद

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यूपी के सहारनपुर में राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर रजत पदक जीत चुकी हैं।

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इसके बाद पूणे में हुई एशियन चैंपियनशिप की ट्रॉयल हुई।

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तीन अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेल चुकी हैं। सीनियर चैंपियनशिप तेहरान और एशियन चैंपियनशिप प्रतियोगिता (ईरान) में कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

स्मृति की खेल उपलब्धियां
कुराश को जानें

कुराश कुछ हद तक पहलवानी की तरह ही है। दोनों में बस इतना फर्क है कि दोनों के नियम थोड़े अलग है। लेकिन अगर आप इस खेल को देखेंगे तो ये बिल्कुल आपको कुश्ती जैसी ही लगेगी। कुराश रेसलिंग के लिए उपयोग होने वाली तुर्की टर्म है। कुराश उज्बेकिस्तान की पारंपरिक मार्शल आर्ट की शैली है। अगर कुराश को आसान शब्दों में समझे तो यह कुश्ती का वह रूप है जिसमें शरीर के निचले भाग का उपयोग नहीं किया जा सकता। इस खेल में कमर के नीचे के हिस्से को ना तो पकड़ा जाता है और ना ही हिट या उस पर किट मारी जा सकती है।
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इस खेल में ना तो आर्मवॉक्स किया जाता है और ना ही चोकिंग तकनीक का उपयोग किया जाता है। कुराश को खेल का दर्जा मिले ज्यादा समय नहीं हुआ है, साल 1980 में ही इसे खेल माना गया। अगर इस खेल के नियम की बात करें तो इस खिलाड़ी को अपने विरोधी को ग्रांउड पर गिराना होता है।
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