कैथल। शिक्षा विभाग की योजनाएं धरातल पर किस तरह से दम तोड़ रही हैं, इसका बड़ा उदाहरण स्कूलों में लगाई गई बायोमीट्रिक मशीन हैं। इस योजना पर कितना खर्च आया और यह खर्च किसके काम आया। यह तो जांच का विषय है।
लेकिन स्कूलों में अभी तक बायोमीट्रिक मशीनें बंद पड़ी हैं। अधिकारियों को अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मशीनें क्यों लगाई गई हैं? बार-बार मीटिंगों में यह प्रश्न उठ रहा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2011 में प्रदेश के सभी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनें लगाई गई थी। वर्तमान में कुछ स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीनों में लाइट जल रही है, लेकिन अधिकतर मशीनें बंद पड़ी हैं। शिक्षा विभाग ने स्कूल मुखियाओं को बायोमीट्रिक मशीन पर कुछ भी बोलने से मना किया है। पिछले तीन वर्षों से स्कूल मुखिया व जिला शिक्षा अधिकारी बायोमीट्रिक मशीन में चिप न होने की बात कह रहे हैं।
ये है योजना
अध्यापकों को सुबह स्कूल के समय बायोमीट्रिक मशीन में अंगूठा लगाना था। शाम के समय जब छुट्टी के बाद में अंगुठे का प्रयोग करते हुए हाजिरी लगानी थी। अध्यापक के आने और जाने के बारे की रिपोर्ट सीधे शिक्षा विभाग पहुंचनी थी। लेकिन बीते तीन साल से मशीनें लगाने के अलावा कोई प्रगति नहीं हुई है और योजना ने लगभग दम तोड़ दिया है।
मामले में हो सकती है गड़बड़ी : अध्यापक संघ
इस संदर्भ में हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला सचिव सतबीर गोयत ने बताया कि बायोमीट्रिक मशीनों में बड़ा घोटाला हो सकता है। जिसकी जांच करवाई जानी चाहिए। करीब तीन साल से विभाग झूठे वादे कर रहा है। अगर किसी कंपनी को इसका ठेका दिया गया है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अधिकतर स्कूलों में बायोमीट्रिक मशीन खराब हो चुकी हैं। जिसकी कोई संभाल नहीं है।