संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका/कैथल। कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर जीत के लिए भाजपाइयों को जहां मोदी मैजिक का सहारा है वहीं विपक्ष से भी जीत के अपने दावे किए जा रहे हैं। दोनों मुख्य प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि लोगों का कहना है कि दावों में कहीं भी आत्मविश्वास नजर नहीं आता। कारण साफ है कि मतदाताओं ने कहीं भी यह स्पष्ट होने ही नहीं दिया है कि कुरुक्षेत्र विजय किसके हिस्से में आएगी।
गौरतलब है कि पिछले दो लोकसभा चुनावों में भारी मतों के अंतर से जीत हासिल करने वाली भाजपा किसान आंदोलन का गढ़ होने के कारण मुश्किल में नजर आई। वहीं, विपक्ष भी मोदी नाम के मैजिक व नवीन जिंदल के पिछले कार्यकाल के दौरान आम लोगों के साथ बने जुड़ाव के सामने अनेक मौकों पर दबे-दबे से नजर आए। कोई भी साफ तौर पर यह कहने की स्थिति में नहीं है कि इस बार कुरुक्षेत्र सीट पर किसकी जीत होगी।
कहा जाए तो धर्मनगरी कुरुक्षेत्र से ही तय होगी सरकार की अगली राह। कुरुक्षेत्र लोकसभा चुनाव को लेकर शनिवार को प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद हो गया है। चुनाव नतीजे चार जून को आएंगे। कुरुक्षेत्र सीट से वैसे तो 31 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, लेकिन असली मुकाबला भाजपा के नवीन जिंदल व गठबंधन के प्रत्याशी सुशील गुप्ता के बीच देखा जा रहा।
नतीजों पर अब प्रत्याशियों की हार जीत का गुणा भाग शुरू हो गई है। इस चुनाव से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की प्रतिष्ठा भी दांव पर हैं। सैनी प्रदेशाध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री भी हंै और इस लोकसभा सीट से पिछले दो चुनावों में भाजपा ने जीत दर्ज
की है।
हालांकि भाजपा इस लोकसभा सीट के लिए हैट्रिक के लिए चुनावी मैदान ये है और गठबंधन अपनी साख बचाने के लिए चुनावी दंगल में है।
सुरजेवाला की भी है परीक्षा ः इधर, मतदान के बाद गठबंधन प्रत्याशी सुशील गुप्ता के साथ-साथ चुनाव में उनके साथ जुड़े कांग्रेसी विधायकों व पूर्व विधायकों के अलावा आप के दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर है।
गठबंधन प्रत्याशी सुशील गुप्ता के कंधे से कंधा मिलकर चुनाव लड़ रहे राज्यसभा सदस्य रणदीप सुरजेवाला, लाडवा से विधायक मेवा सिंह, रादौर से विधायक बिशन लाल सैनी, कुरुक्षेत्र से पूर्व विधायक अशोक अरोड़ा, पूर्व मंत्री नरेंद्र शर्मा, गुहला के चार पूर्व विधायक दिल्लू
राम बाजीगर, बूटा सिंह, फूल सिंह खेड़ी, पूर्व विधायक अमर सिंह ढांडे के पुत्र नरेश पांडे, चुनाव लड़ चुके देवेंद्र हंस
सहित कई लोगों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।
आंकड़ों की बात करें तो
पिछले लोकसभा चुनाव नायब सिंह सैनी को लाख 88 हजार 629 मत मिले और कांग्रेस के निर्मल सिंह को 3 लाख 4 हजार 38 मत मिले और इस चुनाव में 3 लाख 84 हजार 891 मतों ने विजयी होकर नायब सिंह सैनी सांसद बने थे।
पिछले चुनाव में वोट प्रतिशत 74 प्रतिशत या जोकि अबकी बार 66.56 रह गया। घटा मतदान प्रतिशत भी दावेदारों को आशंकित कर रहा है। अबकी बार कलायत में 66.16. कैथल में 69.42, गुहला में 66.47, थानेसर में 62.91 प्रतिशत रहा। इसी प्रकार पूंडरी में 57 प्रतिशत, पिहोवा में 62.91, रादौर में 72.31. लाडवा में 7169 व शाहबाद में 69.89 प्रतिशत रहा।