अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। जिले भर में लोगों के लिए जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना किसी बड़ी जंग में जीत हासिल करने से कम नहीं हैं। पुराने अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की इस शाखा के बाहर बुधवार को छोड़कर पूरा सप्ताह लोगों की भीड़ उमड़ी रहती है। जिसमें जिले भर में तीस से चालीस किलोमीटर दूर से आने वाले लोगों को कई-कई चक्कर काटकर जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना पड़ता है। कार्यदिवस में सुबह नौ बजे से लेकर बारह बजे तक ही आवेदन जमा करवाने की खिड़की खुली रहती है। इसके बाद लाइन में बचे लोगों को अगले दिन फिर आना पड़ता है।
यहां लाइन में लगे खेड़ी गुलाम अली से आए ओमप्रकाश ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र के लिए वह कई चक्कर काट चुका है। लेकिन यहां बारह बजते ही खिड़की बंद हो जाती है। वहीं करीब 60 किलोमीटर दूर हरनौली से आए गुरमीत सिंह ने कहा कि वह पिछले दो माह से चक्कर काट रहा है। लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हो रही। गुहला से आए राकेश कुमार ने कहा कि उसका यहां आठवां चक्कर है।
पाबसर से आई चिंतो देवी ने का कि वह 6 महीने से अपने पोते के जन्म प्रमाण पत्र के लिए चक्कर काट रही है। वहीं त्रिलोक सिंह ने कहा कि वह भी अपने पोते के जन्म प्रमाण पत्र के लिए भटक रहा है। गुरपेज सिंह ने कहा कि उसके 14 साल के पोते के जन्म प्रमाण पत्र के लिए वह दो माह से चक्कर काट रहा है। उसने आवेदन तो छोटे पोत्र के लिए किया था, प्रमाण पत्र बनाकर बड़े का दे दिया। अब फिर से दोबारा से पूरी प्रक्रिया अपनानी पड़ेगी।
बाकल से आए अशोक कुमार ने कहा कि वह हर बार 200 रुपये की दिहाड़ी छोड़कर यहां आता है। लेकिन कोई काम नहीं हो पाता। खनौदा के राम सिंह कहते हैं कि जब सरकार ने इसे आनलाइन कर दिया है तो जनता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी जा रही। सरकार को लोगों को आवेदन करने के बारे में जानकारी देनी चाहिए ताकि यहां बेवजह चक्कर ना काटने पड़ें। करोड़ा के बलबीर ने कहा कि उसके आवेदन में नाम ही गलत था, उसे ठीक करवाने में पसीने छूट रहे हैं।
यह हालत यहां लाइन में लगे लगभग हर आवेदनकर्ता की थी। लगभग दो सौ से तीन की संख्या में लाइन में लगे लोग व्यवस्था को कोसते हुए अपने नंबर का इंतजार कर रहे थे।
बुधवार को नहीं होती फाइल जमा, अन्य दिन बारह बजे बंद हो जाती है खिड़की:-
लोगों ने बताया कि बुधवार के दिन यहां फाइल जमा नहीं होती। शेष दिनों में बारह बजे खिड़की बंद हो जाती है। लाइन में जो व्यक्ति बचा होता है, उसे अगले दिन फिर से आना पड़ता है। मांग की जा रही है कि यहां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
8 थाने हैं, पुराने रिकॉर्ड में से ढूंढने के लिए कर्मचारी नहीं:-
इस शाखा में कार्यरत कर्मचारी बताते हैं कि पूरे जिले में 8 पुलिस थाने हैं। एक पुराने आवेदन पर उस थाने का पूरा रिकॉर्ड सर्च करना पड़ता है। यहां कम से कम तीन सर्च क्लर्क चाहिए लेकिन एक की भी व्यवस्था नही है। बारह बजे तक वे आवेदन लेेते हैं, फिर सर्च का काम शुरू करते हैं। जो कर्मचारी हैं, उनमें भी नियमित कर्मचारी काफी कम हैं। यहां हर रोज 200 से 300 की संख्या में लोग नए आवेदन लेकर आते हैं। वहीं कई सैकड़ों पुराने आवेदनों के बारे में पूछताछ के लिए आते हैं।
हर काम में होती है जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता :-
हर कार्य में जन्म प्रमाण पत्र की आवश्यकता पड़ती है। जिसमें समय पर रजिस्ट्रेशन न करवाने वालों को इस तरह से भटकना पड़ता है। इसीलिए बच्चे के जन्म के समय ही उसका जन्म प्रमाण पत्र के लिए रजिस्ट्रेशन अवश्य करवाएं।
कर्मचारियों की यहां कोई कमी नहीं है। आवेदन करने के लिए लोग ही ज्यादा आ रहे हैं। स्कूलों में दाखिले, बुढ़ापा पेंशन सहित कई कार्यों में प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं। भीड़ के कारण परेशानी है। वहीं इसे और सुविधा जनक बनाने के लिए यहां चार विंडो स्थापित की जाएंगी। जिसमें फाइल जमा करवाने के लिए अलग, फीस के लिए अलग और प्रमाण पत्र लेने के लिए अलग विंडो होंगी। इसके बाद ज्यादा समस्या नहीं रहेगी।
डा. बीबी कक्कड़, इंचार्ज-जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा, कैथल।