भारतीय किसान यूनियन सदस्यों ने भाकियू नेता गुणीप्रकाश के नेतृत्व में लघु सचिवालय में प्रवेश द्वार पर धरना दिया तथा डीसी व एसपी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसान नेताओं ने मांग की कि उन्हें भी धान घोटाले की जांच में शामिल किया जाए। गुणीप्रकाश ने कहा कि मंडियों में जब किसान धान को औने-पौने दामों पर लूटा गया। फर्जी जे-फार्म कटवाकर घोटालों को अंजाम दिया जाता है।
फसल को सस्ते भाव में खरीद कर महंगे भाव में व्यापारियों को बेच दिया जाता है। किसानों को सीजन में नमी की जांच के नाम पर परेशान किया गया। उनकी फसल को समर्थन मूल्य से भी 200 से 400 रुपये प्रति क्विंटल की कम दर से खरीदा गया। बाद में इसी बीच की राशि को बिचौलिये खुद हड़प गए। इस मिलीभगत में खरीद एजेंसियों के कई अधिकारी भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जे एवं आई फार्म के आधार पर जांच करवा ले तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। किसानों से बिना जे एवं आई फार्म के खरीदी गई धान को समर्थन मूल्य घोषित होने पर 1450 रुपये में सरकारी खाते में चढ़ा दी गई।
सरकार जांच करवाए कि पिछले वर्ष मंडियों में गेहूं की कुल कितनी फसल आई। अब उन्हीं किसानों की धान की कितनी फसल आई। इससे पता चल जाएगा कि कितना ज्यादा धान यहां बिका हुआ दिखाया जा रहा है। बाद में दूसरे प्रदेशों से सस्ता व घटिया धान खरीद कर समर्थन मूल्य में लगा दिया जाता है। जबकि अच्छी क्वालिटी का चावल खुली मार्केट में बेच दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मिलों में धान की जो जांच की जा रही है, उसमें किसान प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। उनकी सरकार से यह भी मांग है कि किसानों को सीधे भुगतान का कानून लागू किया जाए। इसके बाद किसानों ने एसपी एवं डीसी को ज्ञापन सौंपा।