संवाद न्यूज़ एजेंसी
ढांड। वृद्धावस्था पेंशन में की जा रही कटौती के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने कड़ा रोष जताया है। साथ ही भाकियू नेताओं ने पूर्व सांसदों-विधायकों की पेंशन बंद करने की मांग की।
रविवार को गांव पबनावा में भारतीय किसान यूनियन की बैठक आयोजित की गई। अध्यक्षता भाकियू प्रदेश महासचिव भूराराम पबनावा और युवा भाकियू प्रदेशाध्यक्ष राजीव आर्य ने की। राजीव आर्य ने आय सीमा के नाम पर वृद्धावस्था पेंशन में कटौती के फैसले पर नाराजगी जताई। सरकार पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सैनी की सरकार लगातार पेंशन काट रही है, जिससे गरीब और असहाय बुजुर्ग परेशान हैं। उन्होंने कहा कि पेंशन बहाल कराने के लिए बुजुर्ग पोर्टल और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें समाधान नहीं मिल रहा।
भाकियू प्रदेश महासचिव भूराराम पबनावा ने कहा कि सरकार एक ओर पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों को लाखों रुपये मासिक पेंशन दे रही है, जिनके लिए कोई आय सीमा निर्धारित नहीं है, जबकि गरीब बुजुर्गों के लिए तीन लाख रुपये तक की आय सीमा तय कर दी गई है। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड करार दिया।
पबनावा ने पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी देवीलाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1987 में बुजुर्गों के सम्मान के लिए वृद्धावस्था पेंशन की शुरुआत की थी और उस समय किसी भी प्रकार की आय सीमा नहीं रखी गई थी। उन्होंने
चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री में जरा भी नैतिकता है तो पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों की पेंशन को भी तुरंत बंद किया जाए। बुजुर्गों की काटी पेंशन को बहाल नहीं की गई तो यूनियन आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।