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Kaithal News: प्रशासनिक अनदेखी का शिकार भाई उदय सिंह का ऐतिहासिक किला

Sun, 08 Feb 2026 12:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाने वाला जिले का भाई उदय सिंह का किला आज प्रशासनिक लापरवाही का शिकार होकर बदहाली के आंसू बहा रहा है। विश्व धरोहर के रूप में पहचान मिलने के बावजूद किले की वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि इसके संरक्षण और देखरेख को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है।

हालांकि वर्ष 2013 में किले के जीर्णोद्धार कार्य की शुरुआत की गई थी, लेकिन इसके बाद रखरखाव की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। हैरानी की बात यह है कि पिछले तीन वर्षों से जिला प्रशासन द्वारा इसी ऐतिहासिक स्थल पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, जिनमें सांसदों और मंत्रियों की मौजूदगी भी रही, बावजूद इसके किले की जर्जर हालत सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
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भाई उदय सिंह की मृत्यु के बाद अंग्रेजों ने कैथल पर कब्जा करने का प्रयास किया, जिसे लेकर सिखों और अंग्रेजों के बीच कई युद्ध हुए। अंततः कैथल जागीर और किले पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया।

ऐतिहासिक महत्व के बावजूद न तो किले की नियमित साफ-सफाई की जा रही है और न ही इसके संरक्षण के लिए कोई ठोस योजना नजर आ रही है।

किले के भीतर और आसपास कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिससे इसकी सुंदरता और गरिमा पर गहरा असर पड़ रहा है।

स्थानीय निवासी रमेश कुमार ने बताया कि पहले किले की स्थिति इतनी खराब नहीं थी, लेकिन अब दीवारों में दरारें तक पड़ चुकी हैं।

यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह ऐतिहासिक धरोहर पूरी तरह नष्ट हो सकती है। वहीं बुजुर्ग महिला सुमन देवी ने कहा कि शाम के समय यहां बदबू के कारण रुकना मुश्किल हो जाता है। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं,

क्योंकि जगह-जगह पानी भर जाता है और निकासी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस ऐतिहासिक किले का समुचित संरक्षण कर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह न केवल पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।

किले में आज है

गंदगी का आलम

जिस किले को कभी क्षेत्र की शान और गौरव का प्रतीक माना जाता था, वही किला अब प्रशासनिक अनदेखी और रखरखाव के अभाव में जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। शरारती तत्वों की आवाजाही बढ़ने के कारण किले का प्रवेश द्वार भी बंद कर दिया गया है। किले के चारों ओर फैली गंदगी, टूटती दीवारें और लगातार उठती दुर्गंध यहा आने वाले लोगों को निराश करती है।
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अकबर के शासनकाल में हुआ था निर्माण

भाई उदय सिंह किले का निर्माण मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में हुआ था। इसके बाद वर्ष 1767 ईस्वी में भाई देसू सिंह ने कैथल जागीर के अफगान शासक नियामत खां को पराजित कर सिख राज्य की नींव रखी। उन्हीं के वंशज भाई उदय सिंह ने वर्ष 1823 से 1843 तक कैथल जागीर पर शासन किया।
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