कैथल। दो साल का कोर्स किए जाने के बाद युवा वर्ग का बीएड कोर्स से मोह भंग हो गया है। हालात ये है कि तीन में से दो चरण पूरे होने के बावजूद जिले के 15 बीएड कॉलेज में महज 24 प्रतिशत सीटों पर ही दाखिले हो पाए हैं। 75 प्रतिशत सीटें अभी भी खाली हैं। जिसमें कैसे तो निजी कॉलेज कक्षाएं लगवाएंगे और कैसे स्टॉफ का खर्च निर्वहन होगा? तीसरे चरण में भी दाखिले की उम्मीद ना के बराबर है।
जिले के 15 बीएड कॉलेजों में 1700 सीटें है। जिसमें से केवल 414 सीटों पर ही विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। इस समय विश्वविद्यालय द्वारा दो चरण पूरे किए जा चुके हैं। दाखिले के अंतिम चरण में महज 2 या 3 प्रतिशत दाखिले ही हो पाते हैं। ऐसे में इन कॉलेजों को चलाने में परेशानियां आ सकती हैं। तीसरे चरण के लिए विद्यार्थी 20 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। अभी तक जिले में जिले के 15 कॉलेजों 1286 सीटें खाली पड़ी है।
शिक्षा के क्षेत्र में नहीं दिखता भविष्य:
युवा सचिन कुमार, मुकेश कुमार, संध्या रानी ने कहा कि दो साल का कोर्स किए जाने के कारण बीएड में अब ज्यादा भविष्य नजर नहीं आ रहा। साथ ही दो साल की फीस भी डबल हो गई है। वहीं अध्यापकों की भर्तियों को लेकर चल रहे विवादों के कारण भी इस क्षेत्र में नौकरी की उम्मीद कम हो गई हैं। जिस कारण युवा वर्ग बीएड की ओर नहीं जा रहा।
विद्यार्थियों का दाखिला न लेने का मुख्य कारण
1. बीएड कोर्स के एक वर्ष से बढ़ाकर दो वर्ष के लिए करना।
2. बीएड कोर्स के लिए फीस दोगुनी करना।
3. सरकारी नौकरी में भविष्य न दिखना।
हरियाणा एजूकेशन टीचर एसोसिएशन के महासचिव राजेंद्र ढुल ने बताया कि विद्यार्थियों को दाखिला लेने से पहले यह सोचना चाहिए कि कौन सा कॉलेज सही कक्षाएं लगा रहा है ओर कौन सा कॉलेज दुकानदारी कर रहा है। बिना कक्षाएं लगाए केवल डिग्री लेने का कोई लाभ नहीं है। विश्वविद्यालय व सरकार को इस ओर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एडिड व सरकारी कॉलेजों में ही बीएड कॉलेज होनी चाहिए। प्रदेश में 60 हजार सीटें जारी करके निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जिले के 15 कॉलेजों की यह है स्थिति
कॉलेज नाम सीटें दाखिले
1. चौधरी ईश्वर सिंह कन्या शिक्षण कॉलेज 200 36
2. सरस्वती देवी ममोरियल राजौंद 100 10
3. श्रीराम कॉलेज ऑफ एजुकेशन कैथल 200 64
4. एसएसएम कॉलेज कलायत 50 27
5. सरस्वती कॉलेज टीक 100 00
6. बीपीआर कॉलेज ढांड 100 44
7. युनाईटिड कॉलेज कौल 100 09
8. जाट कॉलेज ऑफ एजुकेशन कैथल 100 41
9. किठाना कॉलेज ऑफ एजुकेशन 50 23
10. एमडीएन कॉलेज कलायत 100 21
11. बाबू अनंतराम कॉलेज कौल 100 35
12. श्री सांई बाबा कॉलेज सीवन 100 13
13. महाराजा अग्रसैन कॉलेज पूंडरी 100 12
14. रामा कॉलेज कुतबपुर 100 26
15. आरकेएसडी कॉलेज ऑफ एजुकेशन 200 53
कोर्स की अवधि दो साल की होने व फीस डबल होने के कारण ही बच्चों का रुझान कम हो गया है। बच्चों को चाहिए कि जहां नियमित कक्षाएं लगें, वहीं दाखिला लें। तभी वे अच्छे ढंग से पढ़ा सकेंगे।
कमलेश संधू, प्रिंसिपल, आरकेएसी बीएड कॉलेज, कैथल।