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ऑनलाइन दस्तावेज साझा करते समय रहें सावधान : एसपी उपासना

Wed, 15 Oct 2025 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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एसपी उपासना। - फोटो : प्राथमिक विद्यालय भभोट परिसर के ऊपर से गई एचटी लाइन।
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। डिजिटल युग में सुविधा के नाम पर लापरवाही बढ़ती जा रही है। लोग बैंक कार्य, नौकरी आवेदन, लोन प्रोसेस या पहचान सत्यापन के बहाने अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो, बैंक पासबुक, मार्कशीट व अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज मोबाइल या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी के भी साथ आसानी से साझा कर देते हैं। इसमें सावधानी बरतें।
पुलिस अधीक्षक उपासना ने इस प्रवृत्ति को अत्यंत खतरनाक बताते हुए लोगों को चेतावनी दी कि ऑनलाइन दस्तावेज साझा करना साइबर अपराधियों को अवसर प्रदान करता है और इसका दुरुपयोग कर वे व्यक्ति को बड़ी ठगी का शिकार बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि साइबर ठग अक्सर खुद को बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, निजी कंपनी प्रतिनिधि, जॉब कंसल्टेंट या लोन एजेंट बताकर संपर्क करते हैं। शुरुआत में यह लोग विश्वास जीतने के लिए मीठी बातें करते हैं और फिर केवाईसी अपडेट, लोन स्वीकृति, नौकरी प्रक्रिया, इनाम वितरण या सरकारी योजना का लाभ दिलाने का बहाना देकर दस्तावेज मांग लेते हैं। कई बार नकली वेबसाइट या फॉर्म लिंक भेजकर भी दस्तावेज अपलोड करवाए जाते हैं। लोग बिना पुष्टि के दस्तावेज भेज देते हैं और बाद में उन्हीं की पहचान का इस्तेमाल सिम कार्ड जारी करने, बैंक खाते खुलवाने, लोन लेने, अवैध लेनदेन करने या आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है।
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एसपी ने कहा कि कई मामलों में देखा गया है कि पीड़ित व्यक्ति को लंबे समय बाद पता चलता है कि उसके नाम से फर्जी खातों में लेनदेन हो रहा है या किसी सरकारी रिकॉर्ड में उसका दस्तावेज इस्तेमाल हो चुका है। कुछ ठग दस्तावेज लेकर पीड़ित को ब्लैकमेल भी करने लगते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी सरकारी विभाग, बैंक या प्रतिष्ठित संस्थान व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया चैट के जरिए दस्तावेज नहीं मांगते। यदि ऐसी कोई मांग आए तो उसे तुरंत संदिग्ध मानते हुए सत्यापन किया जाना चाहिए। पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि ऑनलाइन सुविधा का उपयोग अवश्य करें, लेकिन सावधानी के साथ। किसी भी अनजान व्यक्ति या नंबर पर अपने निजी कागजात न भेजें। यदि कोई परिचित भी दस्तावेज मांगे तो पहले कॉल करके पुष्टि करें। लिंक, क्यूआर कोड, स्क्रीन शेयरिंग या फाइल शेयरिंग के माध्यम से जानकारी भेजने से पहले उसकी सत्यता जानना बेहद जरूरी है। यदि किसी ने जबरन दस्तावेज मांगे हों, गलत दबाव बनाया हो या दस्तावेज का दुरुपयोग किया हो तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज करवाएं।
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उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी तकनीक में माहिर होते हैं और लोगों की भावनाओं का फायदा उठाकर ठगी करते हैं। इसलिए सोच-समझकर ही शेयर करें यह आदत अपनाना जरूरी है। समय रहते जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे कारगर उपाय है। इंटरनेट और सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी से करें और अपने दस्तावेजों को सुरक्षित रखें।
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