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Haryana: डॉलर की मजबूती से बासमती के उत्पादक किसान होंगे निहाल, धान की कीमत 3000 से ऊपर रहने का अनुमान

Mon, 10 Oct 2022 03:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो नसीब सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल (हरियाणा)

सार

पिछले साल सऊदी अरब सहित कई देशों में लगभग 1200 डॉलर प्रति की दर से एक क्विंटल चावल निर्यात किया गया था। विदेशी खरीदारों ने इस दर पर चावल खरीद कर आगे कीमत बढ़ाते हुए बेचा।
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कैथल की अनाज मंड़ी में पहुंचा धान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी (फाइल फोटो)
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विस्तार
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रुपये की कमजोरी और डॉलर की मजबूती से हरियाणा के उन बासमती उत्पादक किसानों को लाभ की उम्मीद है, जो निर्यात की जाने वाली धान का उत्पादन करते हैं। विदेशों में खरीदारों को पिछले साल के मुकाबले डॉलर की मजबूती के कारण सस्ता चावल मिलेगा। इस कारण वे जमकर खरीदारी करेंगे। अधिक मांग होने से बासमती ग्रुप की धान की कीमतों में तेजी की आस है।

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पिछले साल सऊदी अरब सहित कई देशों में लगभग 1200 डॉलर प्रति की दर से एक क्विंटल चावल निर्यात किया गया था। विदेशी खरीदारों ने इस दर पर चावल खरीद कर आगे कीमत बढ़ाते हुए बेचा। इस बार यही एक क्विंटल चावल निर्यातकों को रुपये की कमजोरी व डॉलर की मजबूती के कारण 1050 रुपये में मिल रहा है, जिससे उनका मुनाफा बढ़ना स्वाभाविक है। उन्हें प्रति क्विंटल 150 डॉलर बच रहे हैं, जिससे वे निश्चित तौर पर पहले से ज्यादा चावल खरीदेंगे। इससे किसानों की बासमती ग्रुप की धान की कीमतें कम नहीं आएंगी।

जिले के प्रमुख चावल निर्यातक नरेंद्र मिगलानी ने बताया कि डॉलर की मजबूती से उन्हें रुपया ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है, लेकिन विदेशी खरीदारों को इसका काफी लाभ है। पिछले साल डॉलर एक रुपये के मुकाबले करीब 76 रुपये कुछ पैसे था। इस बार डॉलर मजबूत होकर 82 रुपये से ऊपर पहुंच गया है।
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इसका सीधा फायदा भारत से चावल खरीदने वाले विदेशी खरीदारों को होगा। वे निश्चित तौर पर चावल की खरीद करेंगे। क्योंकि उन्हें पिछले साल वाली कीमत पर चावल मिल रहा है। इसका असर हरियाणा की मंडियों में यह रहेगा कि खरीदार होने से बासमती ग्रुप के दाम कम नहीं होंगे। बासमती किस्म 1718 की कीमतें 3200 से 3500 रुपये तक रहने की संभावनाएं हैं। 1121 के दाम 3200 से लेकर 3800 रुपये तक रह सकते हैं। वहीं परंपरागत बासमती के दाम 4000 से 4500 के बीच रह सकती हैं।

ऑल इंडिया राइस एक्सपोट्र्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि वे इस बात से सहमत हैं कि डॉलर की मजबूती से निर्यात होने वाली धान की कीमतें कम नहीं होंगी। अच्छी कीमतें किसानों को मिल सकती हैं। पूरे प्रदेश से लगभग 16 से 18 हजार करोड़ रुपये का चावल निर्यात होता है। हरियाणा का इसमें लगभग 16 से 17 लाख टन हिस्सा रहता है। हरियाणा का चावल सऊदी अरब, ईरान, ईराक, अमेरिका, यूरोप के अनेकों देशों सहित खाड़ी देशों में निर्यात होता है।

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