जिला बार एसोसिएशन ने डीसी और एसडीएम के व्यवहार से क्षुब्ध होकर सभी राजस्व अदालतों के बहिष्कार का फैसला लिया है। वीरवार को बार परिसर में जिला बार एसोसिएशन की एक बैठक प्रधान अशोक गौतम की अध्यक्षता में हुई। बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया गया कि जब तक डीसी रवि प्रकाश गुप्ता और एसडीएम मनदीप कौर के तबादले नहीं होते उनका बहिष्कार जारी रहेगा।
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान अशोक गौतम ने कहा कि अधिकारी वकीलों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं और वकीलों को कोर्ट का ऑफिसर समझने की बजाय अपना कर्मचारी समझते हैं। उन्होंने बताया कि बुधवार को भी डीसी ने एक वकील आरडी शर्मा के साथ दुर्व्यवहार किया और उसी वकील के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल में शिकायत दे दी। दूसरी ओर एसडीएम मनदीप कौर ने भी जिला बार एसोसिएशन के प्रधान अशोक गौतम और अन्य वकील जानपाल के खिलाफ अपने रीडर के मार्फत डीसी के माध्यम से एसपी सुमेर प्रताप सिंह को शिकायत भेजी है। एसपी ने यह शिकायत जांच के लिए डीएसपी हेडक्वार्टर के पास भिजवा दी है। इस संबंध में डीएसपी की ओर से अशोक गौतम और जानपाल सिंह को धारा 160 सीआरपीसी का नोटिस भेजा गया है।
प्रधान अशोक गौतम ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि बार परिसर में अथवा वकीलों के चेंबरों में बिजली बोर्ड के छापे पड़े हों। यहां के डीसी बदले की भावना से वकीलों के चेंबरों में छापे डलवा रहे हैं। इससे डीसी की ओछी मानसिकता का पता चलता है। इस मौके पर उनके साथ उपप्रधान सुरेंद्र मलिक, सचिव चरण वालिया, कोषाध्यक्ष अनूप, आरडी शर्मा, रणधीर ढुल, संजीव गुप्ता, आरके निझावन, दिनेश पाठक, ओमप्रकाश शर्मा भी उपस्थित थे।
नहीं किया जा रहा दुव्र्यवहार, ना ही बहिष्कार की जानकारी-डीसी
उधर, सभी आरोपों पर डीसी रवि प्रकाश गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए 1 एक करोड़ रुपये की राशि घोषित की गई थी। वकीलों के प्रयासों के बावजूद अधिक चैंबरों की मांग भूमि की अनुपलब्धता के कारण पूरी नहीं हो सकी। यह रिपोर्ट लोक निर्माण विभाग ने दी थी। तभी से वकील लगातार अपनी मांग पूरी करने के लिए जिद्द कर रहे हैं। फाईल में पाया गया कि अक्तूबर 2002 में तत्कालीन डीसी अनुराग अग्रवाल तथा बार के मध्य मासिक किराया आधार पर 142 चैंबरों का समझौता हुआ था। इसके उल्लंघन में 306 चैंबर बनाए गए तथा कभी भी किराया अदा नहीं किया गया। बिजली विभाग में भी कई अनियमितताएं पाई हैं। वकीलों द्वारा तथाकथित बायकॉट के बारे में उन्हें स्पष्ट किया कि बार के प्रधान अशोक गौतम चार-पांच वकीलों के साथ उनसे मुख्यमंत्री की ग्रांट के बारे में मिले थे। उन्होंने इस ग्रांट की राशि को अपने खाते में जमा करवाने के लिए मजबूर किया। इस धनराशि के प्रयोग के लिए कैथल की उपमंडलाधीश इस राशि के प्रयोग के लिए एग्जीक्यूटिंग एजेंसी है तथा धनराशि प्राप्त होने के बाद उनके द्वारा ही यह कार्य करवाए जाएंगे।
वकीलो द्वारा प्रशासन पर उनकी मांगे मनवाने के लिए बार-बार दबाव डाला गया तथा यह दिखाने का प्रयास किया गया कि उन्हें अलग तरीके से व्यवहार किया जाए नहीं तो वे हमें नुकसान पहुंचा सकते हैं। गत दिनों एक वकील द्वारा उपमंडलाधीश न्यायालय के रीडर से दुव्र्यवहार किया गया तथा न्यायालय को बंद करवाने की धमकी दी गई। इस दौरान बार के प्रधान तथा अन्य दो तीन वकीलों ने भी एक आवाज में यह धमकी दी। इस बारे में लिखित शिकायत पर कार्रवाई से संबंधित फाईल को जांच के लिए पुलिस अधीक्षक को भेजा गया, जो लंबित है। बलबथीर सिंह वर्सिज हरियाणा राज्य अपील से संबंधित 27 जनवरी 2015 के मामले में काउंसिल की प्रार्थना पर सरप्लस भूमि से संबंधित केस की सुनवाई को तीन बार स्थगित किया गया। अपीलकर्ता के वकील आरडी शर्मा पेश नही हुए। इससे पूर्व अवसरों पर जिमनी आदेश में यह उल्लेखित है कि जब मामला अध्ययन एवं बहस के लिए है तथा बचाव पक्ष के तर्कों की बहस को सुनकर मामला खारिज कर दिया गया। इसके आधा घंटा बाद वकील पहुंचा तथा बहस करने के लिए जिद्द की। बहस से मना करने के बाद उसने दुव्र्यवहार किया। एक अन्य मामले में अगस्त 2014 से 25 बार यह कहकर मामले की सुनवाई स्थगित करने की मांग की गई कि चंडीगढ़ से अन्य वकील आएगा। मामले को मैरिट के आधार पर खारिज कर दिया गया। डीसी ने कहा कि बार एसोसिएशन द्वारा उनके बायकॉट के संदर्भ में मुझे सूचित नहीं किया गया है। ऐसी सूचना अखबारों तथा पत्रकारों से प्राप्त हुई है। अनावश्यक रूप से मामलों को लंबित रखने की वकीलों की मांग सही नही है तथा यह सरकार की ईच्छा के भी विरूद्ध है। ऐसी अनुचित मांगों को दरकिनार किया जाना चाहिए।