मंडी में बाजरे की फसल की आवक इस वर्ष पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक हो चुकी है पर उसकी सरकारी तौर पर खरीद नही हो पा रही। बाजरे के साथ-साथ कपास, धान की मोटी और बारीक फसल की भी मंडी में पूरी आवक बनी हुई है। मोटी धान सरकार द्वारा निर्धारित किए मानदंडों पर सरकारी खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदी जा रही है। कपास और बारीक धान के साथ बाजरा निजी तौर पर व्यापारियों द्वारा खुली बोली लगाकर खरीदने का कार्य किया जा रहा है। लेकिन बाजरे की खरीद ना होने से किसान परेशान हैं। बाजरे की खरीद के लिए हैफेड को अधिकृत किया गया है।
लोग खरीद एजेंसी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं हैफेड कर्मचारियों के अनुसार जो किसान मंडी में बाजरा लेकर आता है, उसे बिजाई किए गए बाजरे की फर्द जहां पटवारी से प्रमाणित करवा कर लानी है। वहीं प्रति एकड़ 8 क्व़िटल बाजरा की पैदावार मान उसमें से आधा यानी 4 क्व़िटल बाजरा ही एजेंसी द्वारा 1,330 रुपये प्रति क्व़िटल खरीदा जाएगा। सरकार द्वारा लागू की गई शर्तें किसानों के रास नहीं आ रही। जिस कारण किसान व्यापारियों को बाजरा बेचने को मजबूर हैं। पिछले वर्ष जहां मंडी में केवल 1,300 क्व़िटल बाजरे की आवक हुई थी। इस बार यह 10,717 क्व़िटल तक पहुंच चुकी है।
एसडीएम एवं मार्केट कमेटी प्रशासक ओमप्रकाश देविराला ने कहा कि सरकार के नियमानुसार बाजरे की खरीद की जा रही है। किसान निर्धारित मापदंडों को पूरा करें।