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Kaithal News: हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है बाबा शाह कमाल लाल दयाल की दरगाह

Fri, 28 Mar 2025 01:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। जवाहर पार्क स्थित बाबा शाह कमाल लाल दयाल की दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। यहां पर इस बार भी तीन दिवसीय तीन दिवसीय उर्स-ए-बाबा शाह कमाल कार्यक्रम शुक्रवार से शुरू होगा। यह आगामी 30 मार्च तक जारी रहेगा। इस मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर बाबा की मजार पर हाजिरी लगाने पहुंचेंगे।

यह उर्स मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि हिंदू-मुस्लिम एकता की जीवंत मिसाल भी माना जाता है। बाबा शाह कमाल की मजार पर हर समुदाय के लोग मत्था टेकते हैं, जो सांस्कृतिक विविधता में एकता को दर्शाता है। यहां पर रंग-बिरंगी लाइटों के साथ फूलों से सजावट की गई है। मुख्य चौक और पार्क के प्रवेश द्वार आकर्षक दिख रहे हैं।
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बाबा शाह कमाल की दरगाह की देखभाल हिंदू पुजारी करते आ रहे हैं। बाबा कुलवंत शाह के निधन के बाद अब उनके पुत्र बाबा रजनीश शाह गद्दीनशीन के रूप में दरगाह की सेवा कर रहे हैं। यहां हर वीरवार को भक्तों का तांता लगता है। गद्दीनशीन बाबा रजनीश शाह ने बताया कि बाबा शाह कमाल कादरी का जन्म लगभग 550 वर्ष पूर्व बगदाद में हुआ था। वे हजरत गौस पाक की 11वीं पीढ़ी से थे। उनकी भारत यात्रा और बाबा लाल दयाल के साथ उनकी मित्रता एक अद्भुत अध्याय है।

उन्होंने बताया कि बाबा शाह कमाल और बाबा शीतलपुरी के बीच पगड़ी बदल भाई की परंपरा आज भी निभाई जाती है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी देशभर के कव्वाल बाबा का गुणगान करेंगे। उर्स मेले के दौरान 29 मार्च को रात्रि नौ बजे से प्रसिद्ध गायक हमसर हैयात कव्वालियां पेश करेंगे।

बाबा शाह कमाल के भक्त राधे श्याम, नरेश दलाल एडवोकेट, नवीन गुगलानी, अशोक ठकराल, डॉ. गोपाल, मनोज गोयल, आशु कथूरिया सहित सैकड़ों श्रद्धालु दिन-रात आयोजन की तैयारियों में जुटे हैं। उर्स के दौरान तीनों दिन श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन किया जाएगा। भंडारा दोपहर 12 बजे व शाम सात बजे चलेगा। वहीं, गद्दीनशीन बाबा रजनीश शाह ने लोगों से मेले में पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद लेने और भंडारा प्रसाद ग्रहण करने का आह्वान किया है।
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बाबा शीतलपुरी के डेरे से पहुंचेगी पहली चादर

इस उर्स मेले की शुरुआत बाबा शीतलपुरी के डेरे से आने वाली पहली चादर के साथ होगी, जो दोनों संतों की अटूट मित्रता का प्रतीक है। बाबा शाह कमाल और बाबा शीतलपुरी की दोस्ती की मिसाल आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।
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