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बाल सेवा आश्रम की लड़कों की यूनिट बंद

Wed, 07 Sep 2016 11:52 PM IST
ब्यूरो कैथल
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बच्चों के साथ आश्रम संचालक - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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अंबाला रोड पर चलाए जा रहे बाल सेवा आश्रम से डीसी के आदेशों पर लड़कों की यूनिट को बंद कर दिया गया है। यहां से 12 लड़कों को दूसरे आश्रम व उनके परिजनों के पास भेज दिया गया है। साथ ही आश्रम संचालक को 15 दिनों के भीतर-भीतर आश्रम भवन को शहरी इलाके में शिफ्ट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। संचालक का कहना है कि उनसे उनके बच्चे छीन कर अन्याय किया जा रहा है।
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अंबाला रोड स्थित बाल सेवा आश्रम में 25 बच्चों को रखा गया था। जिसमें लड़के और लड़कियां दोनों रखे जा रहे थे। इनमें लड़कों को ऊपरी मंजिल पर तो लड़कियों को नीचे रखा जा रहा था। इसी बीच पिछले दिनों मिली सूचना के बाद डीसी ने आश्रम से लड़कों को शिफ्ट करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन आश्रम संचालक ने इन आदेशों के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय से भी जेजे एक्ट के पालन में जारी किए गए आदेशों के चलते संचालक की याचिका खारिज हो गई। जिस पर आश्रम से 12 लड़कों को शिफ्ट कर लड़कों की यूनिट बंद कर दी गई है। इनमें से 4 लड़कों को बाल उपवन सनातन धर्म मंदिर में भेजा गया है। वहीं 8 को उनके परिजनों की सहमति के बाद उनके पास भेज दिया गया।

बच्चों की पढ़ाई बीच में छूटी
आश्रम से निकाले गए लड़कों में पारस छठी, नंदू सातवीं, कमल आठवीं, सागर आठवीं, मनीष व अंकित नौंवी, कृष्ण कुमार आठवीं में पढ़ रहे थे। जिन्हें उनके परिजनों के पास भेज दिया गया है। ये बच्चे लिटिल फ्लॉवर कान्वैंट स्कूल में थे। सत्र के बीच में स्कूल छूट जाने से इनकी पढ़ाई भी प्रभावित होगी।
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वहीं राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में पढ़ रहे लड़कों में रमन कुमार दसवीं, अनवर 10वीं व गगन 8वीं, मोहित पांचवीं और अरुण तीसरी कक्षा में पढ़ रहे थे। इन्हें बाल उपवन में भेजा गया है। अब आश्रम में केवल 12 लड़कियां रह गई हैं।

15 दिनों में भवन शिफ्ट करने के भी आदेश
आश्रम संचालक को लड़कों की यूनिट बंद करने के साथ-साथ 15 दिनों में बाल सेवा आश्रम को शहरी इलाके में शिफ्ट करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों में कहा गया है कि आश्रम संचालक को बाल संरक्षण समिति के निर्देशों का पालन करना होगा।

दस साल से पाल रहा था बच्चों को, मेरे साथ अन्याय
आश्रम संचालक केवीएस पिल्लई का कहना है कि वे पिछले दस सालों से कई बच्चों को पाल रहे थे। एकदम से उनके बच्चों को बाहर कर दिया गया। जिससे उन्हें आघात लगा है। उनके पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वे लड़कों के लिए अलग आश्रम चला सकें। अब नई मुसीबत ये भी है कि 15 दिनों में आश्रम शिफ्ट करने के लिए कहा गया है। एक दम से वह बच्चों को लेकर कहां जाएंगे। दूसरा आश्रम जहां पर है, वह पूरी तरह से शहरी इलाका है। उन्हें समझ नहीं आता कि यह इलाका शहर से बाहर कैसे हो गया?

किशोर न्याय अधिनियम के तहत हुई कार्रवाई : चेयरमैन
बाल कल्याण समिति के चेयरमैन सुरेंद्र सैनी ने कहा कि यहां माननीय न्यायाधीश के दौरे के बाद प्रशासन द्वारा आदेश दिए गए थे कि इस आश्रम में लड़कों के रहने की दूसरी जगह दी जाए। आश्रम संचालक को इस बारे में निर्देश जारी किया गया था। जब लड़कों को कहीं शिफ्ट नहीं किया गया तो समिति ने उनसे लड़कों को कैथल में ही दूसरी जगह भेजने के लिए कहा गया। यहां रह रहे 12 लड़कों में से 8 लड़कों ने अपने परिजनों के पास जाने की सहमति दी। उनके परिजनों व लड़कों की सहमति के बाद उन्हें उनके परिजनों के पास भेज दिया गया। जबकि 4 को बाल उपवन आश्रम में शिफ्ट किया गया है। पढ़ाई छूटने जैसी बात नहीं हैं। लड़कों को उनकी मर्जी के अनुसार भेजा गया है। वहीं लड़कियों की सुरक्षा के चलते भवन शिफ्ट करने के आदेश दिए गए हैं। क्योंकि उस इलाके में यह अकेला भवन है। इसलिए सुरक्षित जगह आश्रम चलाने के लिए कहा गया है। चेयरमैन ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत यह कार्रवाई हुई है।
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