संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीवन के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरकीरत के दिशा-निर्देश में पोलड़ में नशा मुक्ति अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों और विशेष रूप से युवाओं को नशे की बुराइयों से अवगत कराना और उन्हें इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करना रहा।
अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग से स्वास्थ्य निरीक्षक भारत भूषण गांव पहुंचे और उन्होंने स्थानीय स्कूल में बच्चों को नशा मुक्ति के प्रति जागरूक किया। उन्होंने नशा को एक सामाजिक बुराई बताते हुए कहा कि यह न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उसके परिवार और समाज पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने बच्चों से आग्रह किया कि वे स्वयं नशे से दूर रहें और अपने परिवार व पड़ोस में भी लोगों को इसके प्रति जागरूक करें। अभियान के दौरान भारत भूषण ने गांव की गलियों और दुकानों पर जाकर लोगों से बातचीत की और उन्हें नशे के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने दुकानदारों को सख्त हिदायत दी कि वे किसी भी हालत में बच्चों को बीड़ी, सिगरेट या अन्य नशीले पदार्थ न बेचें।
उन्होंने कहा कि बच्चों को नशे से बचाना समाज की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है और इसमें सभी को मिलकर सहयोग करना होगा। इस जागरूकता अभियान में स्कूल के मुख्य शिक्षक अमर सिंह, आशा वर्कर मालती देवी, नरेंद्र और सुनीता ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।
ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे अभियान समय-समय पर होते रहने चाहिए, ताकि समाज को नशे की गिरफ्त से बाहर निकाला जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावशाली ढंग से चलाया जाएगा।
ग्रामीणों को नोटिस भेजकर डराया जा रहा : दिलबाग
सीवन। कांग्रेस नेता दिलबाग पटवारी ने पोलड़ गांव के मुद्दे पर सरकार और संबंधित विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग ने पहले भी तीन बार गांव में खोदाई करवाई, लेकिन कभी कोई विशेष वस्तु प्राप्त नहीं हुई। बावजूद इसके ग्रामीणों को बार-बार गांव खाली करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
पटवारी ने बताया कि पोलड़ गांव में रहने वाले अधिकतर लोग अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते हैं और रोज़मर्रा की मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने वर्षों की मेहनत से अपने घर बनाए हैं। ऐसे में यदि अचानक उन्हें अपने मकान खाली करने और गांव छोड़ने को मजबूर किया जाता है, तो यह न केवल अन्यायपूर्ण होगा बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी निंदनीय है। संवाद