कलायत। बहरीन के भारतीय दूतावास में ख्वाबगाह (हाउस ऑफ ड्रीम्स) संस्था ने भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने पर वार्षिक कविता महोत्सव दिल से देश तक का आयोजन किया।
कविता महोत्सव में कलायत निवासी अवधेश राणा ने अपनी प्रस्तुति से पंडाल में बैठे सभी लोगों का दिल जीतते हुए तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
अवधेश राणा ने बताया कि कार्यक्रम दिल से देश तक में खाड़ी देशों के 12 उत्कृष्ट भारतीय कवियों ने भाग लिया और हिंदी में अपनी मूल कविता का पाठ किया। उनकी कविता दिल का टुकड़ा है परदेस में, मां रोती है चेहरा छुपा खेस में, ने श्रोताओं के मन को छुआ। कार्यक्रम के समापन पर उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किया गया।
अवधेश पिछले काफी समय से अबू धाबी में इंजीनियर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कविता सत्र का संचालन ख्वाबगाह की संस्थापक अनुपम रमेश किंगेर ने किया। कार्य के मुख्यातिथि राजदूत पीयूष श्रीवास्तव और मोनिका श्रीवास्तव मौजूद रहे।