संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। प्रतिबंध के बावजूद पतंगबाजी में चाइनीज मांझा का इस्तेमाल अब तक बंद नहीं हुआ है। घर से निकलते ही... लोगों को पतंग का चीनी मांझा बहुत डराता है। दरअसल, पक्षियों के साथ इंसानों की भी यह जान का दुश्मन है।
शनिवार को तीज का पर्व है और लोग पतंग जरूर उड़ाएंगे, लेकिन आप ध्यान जरूर रखिएगा कि चीनी मांझा कितना खतरनाक है। इसलिए इसका इस्तेमाल न करें तो बेहतर होगा। चाइनीज मांझा हर साल कई लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। कई लोगों के गले, हाथ, नाक और कान कट रहे हैं। प्रशासन के पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद मांझा बिक रहा है।
असल में यह जरूरी नहीं है कि पतंग उड़ाते समय ही किसी का गला कटे या जख्मी हो अथवा चिड़िया के पंख कटें। जब आपका मांझा कटता है और वह किसी पेड़ आदि पर जाकर रुक जाता है, जमीन पर गिर जाता है या कहीं किसी छत पर आ जाता है तो भी वह किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है।
इस संबंध में डीसी जगदीश शर्मा ने कहा कि पूरे जिले में चीन के बने मांझे की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। जिले में किसी भी स्थान पर इसे बिकने नहीं दिया जाएगा। यदि कोई इसे बेच रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में प्रशासन की टीमें बाजारों का दौरा कर इसकी जांच करेंगी। युवाओं व अन्य लोगों से अपील है कि वे चीन के बना मांझा न ही खरीदें और न प्रयोग करें। इससे किसी की जान को खतरा हो सकता है।
...चपेट में आ गए
शहरवासी पुनीत मल्होत्रा ने कहा कि उसका बेटा चेतन्य दो बार चपेट में आने से घायल हो गया। बीते वर्ष भी वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस बार बीती सात जुलाई को वह घायल हो गया। गनीमत रही कि उसकी आंख बाल-बाल बच गई।
शहरवासी प्रदीप ने बताया कि कि वह लघु सचिवालय की ओर से ढांड रोड पर जा रहे थे। रास्ते में गले में अचानक मांझा उलझ गया। इससे गला चिर गया। उसके साथ कुछ साथी थे, जिन्होंने उसे निजी अस्पताल में पहुंचाया। उसका उपचार चल रहा है।
पतंग उड़ाने के शौकीन बोले...
पतंग उड़ाने वाले कहते हैं कि चीन का मांझा प्लास्टिक का बना होता है। मजबूत होने के कारण पतंग कम कटती है। पतंगों के ज्यादा दूर जाने पर डोर टूटने का डर नहीं होता। मजबूत और अच्छा मांझा मांगने पर ज्यादातर दुकानदार सस्ता होने की वजह से चीन से मिलता जुलता मांझा दे देते हैं। समाजसेवी राजू डोहर का कहना है कि बच्चे बिजली की तारों के पास, सड़क के पास व घर की अधिक ऊंचाई वाली छत पर पतंग न उड़ाएं। यदि कोई उड़ाए भी तो उसमें चाइनीज मांझा का उपयोग न करें। चाइनीज मांझा से शहर में आए दिन लोग घायल हो जाते हैं। ऐसे मामले शहर में कई वर्षों से आ रहे हैं। बीते वर्ष भी रेलवे ओवर ब्रिज पर राहगीरों के सामने चाइनीज मांझा आने से कई लोग घायल हो गए थे। उन्होंने सभी से अपील की कि पतंग उड़ाते समय चाइनीज मांझा का प्रयोग न करें। यदि किसी को उड़ाना ही है तो वह कच्चे धागे की डोर लें ताकि किसी को कोई नुकसान न हों।
चीन के मांझे पर है प्रतिबंध
शहर के दुकानदार कार्तिक सोनी ने कहा कि प्रशासन की ओर से चीन के मांझे पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। वह अपनी दुकान पर चाइनीज मांझा नहीं बेचते।। वह धागे का मांझा रखते हैं। इससे किसी भी मनुष्य व पक्षी को कोई नुकसान नहीं होता। वह भारत में बनी डोर रखते हैं। उसकी दुकान पर पांच रुपये से लेकर 500 रुपये तक की पतंग रखी हुई है। इसके लिए वह धागे की डोर की बेचते हैं और किसी प्रकार की प्लास्टिक की मांझा नहीं बेचते। उन्होंने कहा कि चाइनीज मांझा से लोगों को नुकसान होता है। बीते वर्ष भी कई लोगों की गर्दन, नाक, मुहं, उंगली कटने के मामले सामने आए थे। इसे देखते हुए उन्होंने चाइनीज मांझा न रखने और न बेचने का निर्णय लिया है। दुकानदार राघव ने कहा कि वह अपनी दुकान पर चाइनीज मांझा नहीं रखते हैं। चाइनीज मांझा से लोग असुरक्षित है। हर वर्ष चाइनीज मांझा से घायल होने के मामले आते है। उन्होंने कहा कि वह भारत में बनी धागों की डोर का ही इस्तेमाल करते हैं। कई ग्राहक आकर मांगते भी हैं वह ग्राहकों को भी धागे की डोर उपयोग करने की सलाह देते हैं।
एमबीबीएस डॉक्टर कुशल मेहता ने कहा कि आजकल त्योहार का सीजन चल रहा है। इसमें बच्चे पतंग उड़ाते हैं। इसमें बच्चे चाइनीज मांझा का अधिक प्रयोग करते हैं। यह चाइनीज मांझा बहुत ज्यादा जानलेवा व बहुत ही खतरनाक है। पतंग कटने के बाद यह जैसे ही नीचे आते है तो यह वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बनती है। चाइनीज मांझा लोगों के शरीर में फंस जाती है और गंभीर रुप से घायल होते है। डॉक्टर ने लोगों से व बच्चों से चाइनीज मांझा का प्रयोग न करने की अपील की है। ताकि राहगीर सुरक्षित रहे।